*विधा:-मनहरण घनाक्षरी*
*तिरंगा लेके हाथ में*
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तिरंगा लेके हाथ में,आओ बढ़ाएँ कदम,
मातृभूमि की खातिर,मिटे साथियों हम.
है हिमालय कहता,अरियों के तोड़ें भ्रम,
केसरी की चाल सम,करें प्रहार हम.
भारत अब क्यूँ सहे,ये नापाक वार क्रम,
भरें अब रुधिर में,जोश अक्षय दम.
नाज करे दुनिया ये,साज जय सरगम,
तोषण कहे आज से,हो वन्दे मातरम्.
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तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव डौंडी लोहारा
छत्तीसगढ़
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