*तुलसी बिहाव के ऊपर दोहा तोषण के*
जनम धरे शिव तेज ले,हवय जलन्धर नाँव।
थर-थर काँपय देवता,भागय डरके गाँव।।
बड़भगमानी हे सती,बिन्दा जेकर नाँव।
बरन करय जलन्धर के,सुघ्घर परके पाँव।।
बढ़थे अत्याचार जब,देव करय गोहार।
महादेव भोले करव,दानव के खोहार।।
लड़त लड़त जलन्धर ले,शंखर मानय हार।
जाके हरि के तीर मा,कहय जी समाचार।।
मानय बतिया देव के,हरि होगे तइयार।
बिन्दा के सत भंग बर,चलिस हवय जी द्वार।।
होवय बिन्दा अपबरित,मरय जलन्धर आज।
सतबल ले हे जानलिस,रमारमन के राज।।
होवय शापित जब बिसनु, बनगे सालीग्राम।
होगे बिन्दा अब अमर,धरके तुलसी नाम।।
रचना तोषण के हरे,अमर कथा के सार।
भूलचूक ला दव छमा,करदव मोला पार।।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
9617589667
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