तोर पीरीत के बंधना गोरी कभू झन टूटय
हावय मोला किरिया छंईय्या संग नंइ छूटय
मर जाहूं तोर बिना कहत हावंव आज
धर थोरि धीरज राजा दू दिन के बात
सपना म तोर चेहरा रात दिन झूलय
हावय मोला किरिया छंईय्या संग नंइ छूटय
देख तोर चेहरा ल चंदा ह लजाए
धन होगे जिनगी तै मोर घर म आए
मया फूल बगिया म फूल मोंगरा फूलय
हावय मोला किरिया छंईय्या संग नंइ छूटय
दूनो झन मिलके आ बसाबो मया कुरिया
फूल कस महकत हे हमर घरबुंदिया
हटे दुख बदरा सबो सुख झन रूठय
हावय मोला किरिया छंईय्या संग नंइ छूटय
पीरीत के छंईहा म मैं राखिहंव तोला
तीही मोर महादेव तीही शंकर भोला
बिरह के जहर जोही कभू झन घूरय
हावय मोला किरिया छंईय्या संग नंइ छूटय
तोषण कुमार चुरेन्द्र
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें