रिमझिम सावन देख , गीत है गाती पुरवा।
मोर पंख ले साथ,सजे है मानों दुरवा।
बरसे मेघ अथाह,दामिनी मद मे डोले।
दिनकर देखे मौन,हृदय खाये हिचकोले।
तोषण चुरेन्द्र "दिनकर"
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...
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