बिहाव मा मड़़वा के आगू चुल्हा अउ सील बनाय के परिपेक्ष मा थोरिक मतिअनुसार जानकारी....
मनखे के जनम ले मरन तक सोला संस्कार होथे।जेमा बिहाव संस्कार भी शामिल हे।वइसे तो बिहाव मा घलो बड़ाकन नेंग होथे जइसे बहु खोजइ ले धरम टीकावन अउ बेटी बिदाई अउ आनी बानी के।त बात होत हे मड़वा के आगू मा चुल्हा अउ सील के। सियान मन कथे कि नोनी अउ बाबू मन के जब बिहाव मढ़ाथे त चुलमाटी लानके यथा स्थान जइसे चुलघर मड़़वा ठऊर आदि जगा म रखे जाथे। नोनी बाबू मन के जब बिहाव होथे त ओमन अपन कँँवारा पन ल छोड़ के घरू (गृहस्थ)जिनगी म कदम रखथे । गृहस्थ ल चलाय बर घर मा चुल्हा के जलना जरूरी हे। अउ चुल्हा कब जलही जब दुनों जुग जोड़ी के मन,तालमेल,आपसी सूझबूझ ,सांठगांठ ह बने रही।रही बात सील के त ओकरो कारण हे कथे सियान मन कि सील ह सबो मसाला ल पीस के एक कर देथे ।अउ साग के सवाद ल बढ़िहा बनाथे। ओइसने ढंग ले।जुग जोड़ी के घर मा सबरदिन सुख के दारभात चुल्हा म चुरत राहय अउ बढ़िहा गुरतुर मसलहा साग पान खाके जिनगी जुग जोड़ी कमावत खावत राहय। मोर मतिअनुसाआर
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