बुधवार, 21 अप्रैल 2021

नीति नियम

पढ़ा लिखा इन्सान कोई जब 
नीति नियम पर प्रश्न उठाये।
कौन भला दुनिया में उसको 
पैर पकड़ कर समझाये।
बेमतलब की बात करे जो 
खाली पीली माथ खपाये।
अपनी पे आ जाये कोई 
उल्लू जैसे आँख दिखाये।


नीति नियम भ्राता ज्ञाता 
सब कोई अपनी हाँके जाने।
गाँव नगर लाक हुआ पूरा  
फिर भी अपनी ही है ताने। 
चलता कोई राह नहीं है 
सच्ची कितनों के समझाने।
मुर्ख बने फिरते हैं जन कोई 
बात नहीं एक न माने।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगांव डौंडी लोहारा

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