आ जाओ हे प्यारे कान्हा धरती के भार हटाने को
तरस रही है कान आजा गीता ज्ञान सुनाने को
तरस रही है कान आजा गीता ज्ञान सुनाने को
अनगिन अत्याचार करने बढ़ रहे अत्याचारी
स्वार्थी बनकर तेरे जग में करते भ्रष्टाचारी
भरदो सबके अंतरात्मा समरसता के गाने को
तरस रही है कान आजा गीता ज्ञान सुनाने को
स्वार्थी बनकर तेरे जग में करते भ्रष्टाचारी
भरदो सबके अंतरात्मा समरसता के गाने को
तरस रही है कान आजा गीता ज्ञान सुनाने को
द्रोपदी की लाज आज भी जरा नही है बाकी
दुर्योधन दुशासन जैसे दिखते कितनों झाँकी
मुक्त कर से प्रतिपल अपने शील पर चीर लुटाने को
तरस रही है कान आजा गीता ज्ञान सुनाने को
दुर्योधन दुशासन जैसे दिखते कितनों झाँकी
मुक्त कर से प्रतिपल अपने शील पर चीर लुटाने को
तरस रही है कान आजा गीता ज्ञान सुनाने को
ये मेरा ये तेरा कहके राग हैं सभी आलापे
एक दूसरे को फाँसने रोग बड़े है ब्यापे
रहे सदा एक छत के नीचे गोवर्धन उठाने को
तरस रही है कान आजा गीता ज्ञान सुनाने
एक दूसरे को फाँसने रोग बड़े है ब्यापे
रहे सदा एक छत के नीचे गोवर्धन उठाने को
तरस रही है कान आजा गीता ज्ञान सुनाने
तोषन धनगंइहा

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