गुरुवार, 18 फ़रवरी 2021

नेंग जोग

बिहाव मा मड़़वा के आगू चुल्हा अउ सील बनाय के परिपेक्ष मा थोरिक मतिअनुसार जानकारी....

मनखे के जनम ले मरन तक सोला संस्कार होथे।जेमा बिहाव संस्कार भी शामिल हे।वइसे तो बिहाव मा घलो बड़ाकन नेंग होथे जइसे बहु खोजइ ले धरम टीकावन अउ बेटी बिदाई अउ आनी बानी के।त बात होत हे मड़वा के आगू मा चुल्हा अउ सील के। सियान मन कथे कि नोनी अउ बाबू मन के जब बिहाव मढ़ाथे त चुलमाटी लानके यथा स्थान जइसे चुलघर मड़़वा ठऊर आदि जगा म रखे जाथे। नोनी बाबू मन के जब बिहाव होथे त ओमन अपन कँँवारा पन ल छोड़ के घरू (गृहस्थ)जिनगी म कदम रखथे । गृहस्थ ल चलाय बर घर मा चुल्हा के जलना जरूरी हे। अउ चुल्हा कब जलही जब दुनों जुग जोड़ी के मन,तालमेल,आपसी सूझबूझ ,सांठगांठ ह बने रही।रही बात सील के त ओकरो कारण हे कथे सियान मन कि सील ह सबो मसाला ल पीस के एक कर देथे ।अउ साग के सवाद ल बढ़िहा बनाथे। ओइसने ढंग ले।जुग जोड़ी के घर मा सबरदिन सुख के दारभात चुल्हा म चुरत राहय अउ बढ़िहा गुरतुर मसलहा साग पान खाके जिनगी जुग जोड़ी कमावत खावत राहय। मोर मतिअनुसाआर

रविवार, 24 जनवरी 2021

नेता जी

*नेता जी*

जब जब अत्याचार बढ़ा।
तब तब नव उन्वान चढ़ा।
बनकर ढाल जो सुभाष ने,
अरि के  आगे  रौद्र खड़ा।

आजादी की खातिर जिसने,
खून देने का आह्वान किया।
लेकर एक सेना की टुकड़ी,
सीना को बढ़कर तान दिया।

नेता जी नाम अमर हो गया,
नवभारत के नव इतिहास में।
ऋणी रहेगा सदा देश अपना,
ऋतु  तीनों  मधु मधुमास में।

दिनकर  यश गाता मिलकर,
ले तिरंगा देश का स्व हाथ में।
आओ जयकार करे देश की,
हिल मिल कर एक साथ में।

तोषण चुरेन्द्र दिनकर
धनगाँव डौं.लोहारा

शनिवार, 16 जनवरी 2021

तैहा दीया देखाये गा

समीक्षा में
*मुखड़ा*
तैहा दीया देखाये गा तुलसी
रामायण सिरजाई के
तैहा गंगा नँहवाये गा तुलसी
राम भजन ल गाई के..

*अंतरा*
अवघड़ दानी शंकखर भोला
सती ल कथा सुनाये~~~
कँऊवा तरगे गिधवा तरगे
राम के ध्यान लगाये~~~
नारद बीना बजाये गा तुलसी
हरि भजन ल गाई के.......1

*अंतरा*
गोड़ ल धोके केवट तरगे
पुरखा ल पार लगाये~~~
नवधा सुनके शभरी उबरगे
हरि के धाम ल पाये~~~
हनुमत चुटकी बजाये गा तुलसी
भक्ति के धुन ल गाई के....2

*अंतरा*
राम नाम के अमरित धारा
गाँव गली म बोहाये~~~
आवय संगी दीदी भइय्या
मिल जयकारा लगाये~~~
तोषण खुशी मनाये गा तुलसी
हरि भजन ल गाई के.....3

©®
तोषण चुरेन्द्र{दिनकर}
धनगाँव डौंडी लोहारा

बुधवार, 13 जनवरी 2021

राम नाम




*आल्हा छंद*
*राम नाम*

आये हावस जग मा संगी,भजले राम नाम तँय थोर।
नइ भजबे ता बिरथा जाही,बात मानले थोरिक मोर।।
बेटा बेटी काम न आही,धन दौलत नइ जावय साथ।
आही यमराजा लेगेबर,मलते रहिबे तैहर हाथ।।

द्रोणा जइसे गुरु हे चलदिस,चलदिस बाली बलवान।
आही आरी पारी इकदिन,अतका संगी सबके जान।।
कोनों बाँचे रहय नही गा,जाए बर परही शमशान।
जीयत भरले तैहर भइया,राम नाम करले गुणगान।।

जपत जपत रत्नाकर तरगे,राम नाम हे लिखदिस सार।
चढ़जा दीदी चढ़जा भइया,हो जाबे ये भव ले पार।
तोषण दिनकर काहत हावय,गाले तैहा हरि के नाम।
नइ गाबे ता तँय पछताबे,बन जाही सब बिगड़े काम।।

©opy®ight
तोषण चुरेन्द्र 'दिनकर'
सरपंच/साहित्यकार
धनगाँव डौ.लोहारा

सोमवार, 11 जनवरी 2021

मोर छत्तीसगढ महातारी

मोर छत्तीसगढ़ महातारी 
तोर महिमा हावय भारी
धान के कटोरा भावय
भारत माँ के दुलारी....

नदिया नरवा डोंगरी पहाड़ी
कोरा म तोर इतरावय
हरियर हरियर खेती डोली
पुरवइय्या संग लहरावय
अमरइय्या म कुहकत हे
मनमोहनी कोयलिया कारी
मोर छत्तीसगढ़ महातारी 
तोर महिमा हावय भारी....

सुवा करमा पंथी ददरिया
मान ल तोर बढ़ावय
छत्तीसगढ़ मोर छंइहा भुंइया
मया के अचरा ओढ़ावय
तोर कोरा म गुँजत रहिथे
लइका के किलकारी
मोर छत्तीसगढ़ महातारी 
तोर महिमा हावय भारी

हलधर बेटा सुत उठ के
तोरे सेवा बजावय
महिनत करके दिन रतिहा
सोनहा धान उपजावय
खाँध म नाँगर हाथ तुतारी
बइला जेकर संगवारी
मोर छत्तीसगढ़ महातारी 
तोर महिमा हावय भारी

बीर नरायण गैंदसिंह नायक
जस कतरो बलिदानी हे
महातारी तोर रक्षा खातिर
लिखदिस अमर कहानी हे
दिनकर संग म गावत हे
छत्तीसगढ़िहा ओरी पारी
मोर छत्तीसगढ़ महातारी 
तोर महिमा हावय भारी...


तोषण कुमार चुरेन्द्र "दिनकर"
धनगाँव, डौंडी लोहारा
बालोद छ.ग

मंगलवार, 5 जनवरी 2021

आजा भरे दरबार

बिनती तोर करत हँव रामा आजा भरे दरबार 
दीन दुखिया के लाज रखदे गावय जग संसार

सरयु नदी मा नहाखोर के अगर कपूर जलावँव
पान फूल अऊ नरिहर धरके दंडा पाँव पखारँव
मोर मुड़ी मा हाथ रखदे करदे मोर उदधार
दीन दुखिया के लाज रखदे गावय जग संसार

केंवट भैय्या के पुरखा तरगे गोड़ धोके सुख पाय
राम लखन माता जानकी गंगा ले पार लगाय
लहरा लेवय गंगा मैय्या बीच भँवर मझधार
दीन दुखिया के लाज रखदे गावय जग संसार

पक्षी राज जटायु ल तारे शबरी के बोईर खावय
भवसागर ले पार करेबर नवधा भगति सुनावय
अमृत असन लागे रामा तोर नवधा के धार
दीन दुखिया के लाज रखदे गावय जग संसार

बैरी बर तै बनथस बैरी दुखिया के मीत मितान
अन्यायी बाली ल रामा खींच के मारे बान
तोर दया ले आज गावत हँव मैं रमायन सार
दीन दुखिया के लाज रखदे गावय जग संसार

©opy®ight
तोषण चुरेन्द्र दिनकर
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़

रविवार, 3 जनवरी 2021

छत्तीसगढ़िहा युवा

विषय-छत्तीसगढ़ी युवा
======================

छत्तीसगढ़ के युवा जागव।
सुग्घर भुंइया सिरजावव।।1 

खांध  मा  नांगर धरलव।
धान के कटोरा भरलव।।2

छत्तीसगढ़ के बेटा रतन।
करले एखर बने जतन।।3

जोर  युवा  के  हाथ मा।
सरकार हे तोर साथ मा।।4

जम्मो युवा छत्तीसगढ़ के।
हाथ बढ़ावव  बढ़-बढ़ के।।5

छत्तीसगढ़ के युवा किसान।
जुरमिल करव करम महान।।6

छत्तीसगढ़ी  युवा के जोर हे।
जग मा जेकर करम शोर हे।।7

बेटा छत्तीसगढ़ महातारी के।
फूलवा जइसे  फूलवारी के।।8

शेर जइसे युवा के दहाड़ हे।
कांपे डोंगरी अऊ पहाड़ हे।।9

छत्तीसगढ़िहा युवा तलवार हे।
थरथरावय  जग  संसार हे।।10

दिनकर जइसे युवा दमके।
रात मा चंदा कस चमके।।11


तोषण कुमार चुरेन्द्र " दिनकर"
धनगाँव ,डौंडी लोहारा
जिला बालोद छ.ग.
पिन:-491771
 मो:-9617589667

गुरुवार, 10 दिसंबर 2020

सावन के महीना मा

सादर समीक्षार्थ

सावन के महीना मा...

सावन के महीना मा, 
मन मोर मँजूर कस नाचय।
सनन-सनन चलय पुरवइय्या, 
गीत मया के गावय। 

होत बिहनिया सुरूज नरायण,
नवा अंजोर बगराथे।
दंडाशरन पाँव पँइय्या परके, 
मिलजुल सब परघाथे।
संगी जँहुरिया सुआ करमा, 
पंथी ददरिया सुनावय।.....

डोंगरी पहाड़ी चिरई चिरगुन,
देख मोला मुसकाथे।
कारी बदरा गरजे घन-घन, 
भुँइया के तन हरियाथे।
बरसय पानी झूमे रूख राई, 
नदिया नरवा इतरावय।....

पिंयर-पिंयर परसा फूलवा, 
संग फगुआ के राग हे।
सात सुर के धुनी छेड़य, 
सतरंगी संगी फाग हे। 
रहिबो एक डोरी बंधाके, 
तोषण अतरी गोहरावय।...

©opy®ight
तोषण कुमार चुरेन्द्र 'दिनकर'
सरपंच/साहित्यकार
धनगाँव, डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़

गुरुवार, 19 नवंबर 2020

हाय रे कोरोना चेकप


हाय रे कोरोना चेकप

आए रेहेन लोहारा संगी,सर्दी चेक कराय।
खँस्सी के चक्कर मा,बालोद रद्दा नपाय।

भरे मातर तिहार मा,आगेन कोविड सेंटर।
लागय अइसन का पड़ीस,हमला कोरोना हेंटर।

साग भात हा बने मिले,रोटी भाजी अचार।
साफ सफाई मा ढंग निही,सुख सुविधा बेकार।

भरे लिफाफा दिस थेमा,डाक्टर देखे नंइ भाय।
छत्तीसगढ़ सरकार के,कइसन बेवस्था आय।

चेक वेक करे निही ,परछी माढ़े हे मशीन।
आय जाय न हमला कहीं,चपकन काला कतीन।

लाके खोली म धान देहे,यहू का के हे काम।
मरे मरइय्या जान दे,अइसने चलही काम।

आनी बानी गोठ करथे,हमर छत्तीसगढ़ सरकार।
बिन नाहक जियत मरत हे,बने जनता लाचार।

गोठ करबे त गोठ हे,कतिक ला अब गोठियाँव।
सबे ला झिन कोरोना निकालव,अतरी मैं गोहराँव।

दू गज के दूरी अउ,मास्क हावय जरूरी कहिथे।
सुख-दुख घमनी-छँइहा,गरीब किसनहा सहिथे


तोषण चुरेन्द्र दिनकर
सरपंच(साहित्यकार)
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़

मंगलवार, 17 नवंबर 2020

हाय रे कोरोना चेकप

हाय रे कोरोना चेकप

आए रेहेन लोहारा संगी,
सर्दी चेक कराय।
खँस्सी के चक्कर मा,
बालोद रद्दा नपाय।

भरे मातर तिहार मा,
आगेन कोविड सेंटर।
लागय अइसन का पड़ीस,
हमला कोरोना हेंटर।

साग भात हा बने मिले,
रोटी भाजी अचार।
साफ सफाई मा ढंग निही,
सुख सुविधा बेकार।

भरे लिफाफा दिस थेमा,
डाक्टर देखे नंइ भाय।
छत्तीसगढ़ सरकार के,
कइसन बेवस्था आय।

चेक वेक करे निही ,
परछी माढ़े हे मशीन।
आय जाय न हमला कहीं,
चपकन काला कतीन।

लाके खोली म धान देहे,
यहू का के हे काम।
मरे मरइय्या जान दे,
अइसने चलही काम।

आनी बानी के गोठ करथे,
हमर छत्तीसगढ़ सरकार।
बिन नाहक जियत मरत हे,
बने जनता लाचार।

गोठ करबे त गोठ हे,
कतिक ला अब गोठियावँव।
सबे ला झिन कोरोना निकालव,
अतरी मैं गोहरावँव।


जय श्री राम
तोषण चुरेन्द्र दिनकर
सरपंच(साहित्यकार)
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़

सोमवार, 16 नवंबर 2020

हाय रे कोरोना काल(तोषण चुरेन्द्र दिनकर)

हाय रे कोरोना काल तै कइसन दिन देखाय
छोटे बड़े ला जाने नही अलकर नाच नचाय
हाय रे कोरोना काल......

आय कहाँ ले तैहर बइरी,दुनिया होगे हलाकान
सुतत जागत तोरेच चर्चा,करथे लइका सियान
तीर के मनखे दूरिहा भागे,मुँह मा मास्क लगाय
हाय रे कोरोना काल....

सर्दी खाँसी ह बनगे कोरोना,मन मा डर हे समागे
अस्पताल मा कोई नंइ जावै,कइसन दिन हा आगे
फिरत हावय मनखे देखव,सर्दी खाँसी लुकाय
हाय रे कोरोना काल...

विनती हावय सरकार ले,जल्दी दवा बनादे
हटे कोरोना सगरो जगत ले,नवा अंजोर बगरादे
हाँसय खेलय धरती डोली,रूख रई खुशी मनाय
हाय रे कोरोना काल....


रचनाकार
तोषण चुरेन्द्र दिनकर
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़

शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2020

शरद की अमृत धार

शरद पूर्णिमा की हार्दिक बधाई व शुभकामनाओं के एक रचना....

*शरद की अमृत धार*

चाँदनी रात में आज चाँद खिलखिलाया है।
लगता है जैसे अंबर धरती से मिलने आया है।

शरद की रातें जुगनू की तरह चाँदनी चमकती है।
बूँदे  ओस की धरा पर फैली कोहिनूर दमकती है।
देख - देख नजारा गगन से दिनकर भी शर्माया है।
लगता है जैसे अंबर धरती से मिलने आया है।1।

शरद की सर्द  रातें शीतलता बरसाती मन भीतर।
बगिया मुस्कुराती फूलों की खुश्बू बिखराती ईतर।
नवरसों में मदमाता भँवरा चहूँ दिक में मंडराया है।
लगता है जैसे अंबर धरती से मिलने आया है।2।

मधुबन बहकने लगी आज श्याम दर्श जो होना है।
प्रेम बहार सोलह श्रृंगार लिये एक दूजे में खोना है।
राधेकृष्ण की रासलीला स्वयं शिव देखने आया है।
लगता है जैसे अंबर धरती से मिलने आया है।3।

सप्त सुरों का राग लिए सतरंगी फाग महीना है।
इंद्रधनुषी रंगों की जैसी दुनिया और कहीं ना है।
शरद की अमृत धार से "दिनकर" आज नहाया है।
लगता है जैसे अंबर धरती से मिलने आया है।4।

©®
तोषण चुरेन्द्र दिनकर
धनगांव, डौ.लोहारा
बालोद,छत्तीसगढ़
30/10/20

रविवार, 18 अक्टूबर 2020

दाई के नवरात

दोहा गीत
======================
लाज सभा मा राखले,राहँव सबके मीत।
तोर दया ले आज मैं,गावत हावँव गीत।।
======================
आगे दिन नवरात के,रिगबिग चमके जोत।
हाँसत घर मा जात हे,आथे जेहर रोत।।
रखबे मुड़ मा हाथ तै,दया मया पीरीत।
तोर दया ले आज मैं,गावत हावँव गीत।।
======================
करे भगत गोहार सुन,बाढ़त हावय पाप।
छलकत गघरी देख तै,आजा लेबर नाप।।
पीरा हरले भगत के,सत के होवय जीत।
तोर दया ले आज मैं,गावत हावँव गीत।
======================
दुर्गा दाई रूप नौ,सबके मनला भाय।
जय माता की संग मा,जय जयकार लगाय।।
तोषण दिनकर हे भजे,साँझ बिहान सुखीत।
तोर दया ले आज मैं,गावत हावँव गीत।।
======================
तोषण चुरेन्द्र दिनकर
धनगांव, डौंडी लोहारा
बालोद छ.ग.
======================

रविवार, 13 सितंबर 2020

हिन्दी

विश्व हिन्दी दिवस की बधाई

हिन्दी अपनी शान है,भाषा ये अनमोल।
लिखते-पढ़ते हम सभी,रोज बोलते बोल।
रोज बोलते,बोल समझकर, अपनी बातें।
दुनिया भर में,हिन्दी भाषा,जाने जाते।
चमके जगमग,माथ सजे है,बनकर बिन्दी।
बढ़े बढ़ाये,पढ़े पढ़ाये,मिलकर हिन्दी।


मिलकर अक्षर से जुड़े,छंद बंध का मेल।
नवरस जिनसे नित मिले,चले हिन्द की रेल।
चले हिन्द की,रेल सवारी,अपने द्वारे।
वैदिक नैतिक, ज्ञान समाया,मानें सारे।
हिन्दी कहिए,हिन्दी पढ़िए,लिखिए  खिलकर।
मान बढ़ाएँ,ज्ञान कराएँ,हमसब मिलकर।

तोषण चुरेन्द्र दिनकर

मंगलवार, 21 जुलाई 2020

गीत


रिमझिम सावन देख , गीत है गाती पुरवा।
मोर पंख ले साथ,सजे है मानों दुरवा।
बरसे मेघ अथाह,दामिनी मद मे डोले।
दिनकर देखे मौन,हृदय खाये हिचकोले।

तोषण चुरेन्द्र "दिनकर"

गुरुवार, 2 जुलाई 2020

गुरु

गुरू पूर्णिमा विशेष गीत

गुरूदेव तुम्हारे चरणों में,
बसे हैं चारो धाम।
नमन मेरा स्वीकार करो,
कोटि तुम्हें प्रणाम।


मात पिता है प्रथम गुरूजी,
चलना हमें सिखाया।
सर्दी गर्मी और बरखा में,
छत्र की छाँव बिठाया।
कभी न पूरा ऋण ये होगा,
सुबह से लेकर शाम।
नमन मेरा स्वीकार करो,
कोटि तुम्हें प्रणाम।


शिक्षा दीक्षा दान करे हैं,
सत्य मार्ग दिखलाया।
पाप पुण्य भेद सारे,
गुरूवर ने है बताया।
धर्म कर्म और नीति नियम,
भरे हैं आठो याम।
नमन मेरा स्वीकार करो,
कोटि तुम्हें प्रणाम।


हमको देने नित रोशनी, 
बनकर दीपक जल रहे
कितनी भी आए बाधाएँ, 
ढाल सम है डटे रहे
चरणों में है तेरे झुके, 
राम कृष्ण सुखधाम
नमन मेरा स्वीकार करो,
कोटि तुम्हें प्रणाम।


आशीष सदा बनायें रखना, 
दिनकर की अरदास।
बनकर मेरी प्रेरणा, 
रहना सदा मेरे पास।
कारज कोई भी हो पहले,
जपूँ मैं तेरा नाम।
नमन मेरा स्वीकार करो,
कोटि तुम्हें प्रणाम।

रचनाकार:-
तोषण चुरेन्द्र दिनकर
डौंडी लोहारा बालोद
छत्तीसगढ़

बुधवार, 24 जून 2020

पावस

कलम की सुगंध छंदशाला
विषय:-चित्राभिव्यक्ति
विधा:- कुण्डलियाँ
दिनाँक :-24/06/2020
दिन :-बुधवार

1.
पावस पर्वत में गिरे,मुदित हुआ संसार।
लगती धरणी श्यामला,छाई खुशी अपार।।
छाई खुशी अपार,मगन हो झूमे सारे।
हरा भरा परिवार, वृक्ष भी वारे न्यारे।
दिनकर बैठा मौन,देखकर गहन अमावस।
सकल विश्व में धूम,लौट आई है पावस।

2.
आई है पावस लौट कर,फिर धरती के पास।
हरने धरती की व्यथा,करने जीव उजास।।
करने जीव उजास,गीत है सावन गाते।
भरा भरा है ताल,राग जो झिंगु सुनाते।
भड़क उठी है मेघ ,बहे है नित पुरवाई।
दिनकर देखे मौन,झूम के बरखा आई।

तोषण चुरेन्द्र दिनकर
डौंडी लोहारा बालोद
छत्तीसगढ़

सोमवार, 22 जून 2020

जय जवान (तोषण चुरेन्द्र दिनकर)


दिनाँक:-22/06/2020
दिन:-सोमवार
विधा :-दोहा
विषय :-जय जवान

सर्द गर्म बरसात हो,चलते सीना तान।
करे निरंतर चौकसी,मेरे वीर जवान।।1।।

बनकर जो फौलाद ये,लड़ते हैं पुरजोर।
खड़े रहे हिमशिखर पर,हिम आलय की छोर।।2।।

भारत माँ के लाल हैं,करते सिंह दहाड़।
शत्रु पसीनेंं पोछते,खाते लाख पछाड़।।3।।

खड़ा रहे दिन रात जो,रखने भारत शान।
हँसते हँसते ये सभी,त्यज देते है जान।।4।।

माता ऐसी धन्य है,दिये लाल बलिदान।
भारत मेरा देश ये,है जवान की खान।।5।।

जय जवान कहते चलें,रक्षित जिनसे देश।
शिक्षक और किसान भी,थामे है परिवेश।।6।।


सुन लो हे सरकार ये,सुखी रहे परिवार।
दिनकर भी अब साथ है,माने जग संसार।।7।।

तोषण चुरेन्द्र दिनकर
डौंडी लोहारा बालोद
छत्तीसगढ़

जिद तो अपनी भी थी...

मुक्त गजल 

जिद तो अपनी भी थी इस जमाने मे।
गुजर  जाए  जिंन्दगी तुझे भुलाने में ।

ढूँढती रही नजर मंजर-ए-तन्हाई पे,
गुम हो गई कहां,कौन से कैदखाने में ।

रूखसत हो गई गुलिस्ताँ-ए-इश्क  से,
चुभाना पड़ा हाथ बागबाँ सजाने में।

अर्ज है न गुजरो राह कभी इश़्क के,
आएगा "दिनकर" जहाँ के निशाने में।

तोषण कुमार चुरेन्द्र दिनकर
डौंडी लोहारा बालोद छ.ग.

मंगलवार, 9 जून 2020

राम नाम हे सार


राम नाम हे सार रे,जपले तै हरि नाम।
जाती बेरा थोरकिन,करले बढ़िहा काम।।
करले बढ़िहा काम तै,होवय जग मा शोर।
दया मया ला बाँट ले, बात मान ले  मोर।।
बात मान ले मोर सुन,राम भजन मा झूम।
तोर मोर के फेर मा,ऐती ओत न घूम।।

तोषण चुरेन्द्र दिनकर

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...