*प्रेम सदभाव लिये,*
*एकता संदेश दिये,*
*होली का त्योहार हमें,*
*यही सिखलाती है।*
*रंग सराबोर करे,*
*सुमता के राह गढ़े,*
*सतरंगी रंग सदा,*
*पाठ ये पढ़ाती है।*
*आओ मिल हम साथी,*
*मिलके मनाये होली,*
*बसंत बयार लिये,*
*कोयलिया गाती है।*
*रंगीला परब भावे,*
*मन मेरा नाचे गावे,*
*फाग की नगाड़ा अब,*
*राग जो सुनाती है।।*
*तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा*
*डौंंडी लोहारा बालोद छ.ग.*
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