गुरुवार, 29 जून 2017

सोच

किसी को जरा हमारी अच्छाई देखी नहीं गई

लग गये यारों हमारी बुराई ढूँढने को जहाँ में

*सोच बड़ा कर लेने से मात्र से काम बड़ा नहीं होता....*

*काम बड़ा करने के लिए सोच बड़ा करना पड़ता है....*

*तोषण कुमार चुरेन्द्र*

दुनिया

*होता ना जो चार कदम आगे दुनिया से "तोषण"*
*दुनिया जो है मुझे आठ कदम पीछे धकेल देती**

*जाग उठा शैतान अब गहरी रात के अँधेरों में*
*बचना है तो ढुँढ लो मेरे दुश्मनों का दर कहीं**

तोषण कुमार चुरेन्द्र

जन्मदिवस

*जन्मदिवस पर आज जो,मिला मुझे आशीष।*
*दुआ सभी का साथ हो, जीलूँ लाख बरीस।*

बुधवार, 28 जून 2017

झुमर झुमर के

झुमर झुमर के बरसय पानी,मन मोर अड़बड़ नाचत हे।
घुमर घुमर  के आवय बदरा,संग पवन झकोरा मारत हे।

अधिया गेहे अषाढ़ महिना,पानी के अभी फुहार पड़े।
करिस अगोरा सब किसान मन,करे किसानी बर जोरा करे।
नाँगर बइला कमरा खुमरी,लउठी तुतारी सँवारत हे।
घुमर घुमर के.........१

होवत बिहनिया भुँइया के बेटा,दाई के सेवा बजावय।
हरिहर हरिहर धनहा डोली, लहर लहर लहरावय।
सावन महिना पाख अमावस,तिहार हरेली मनावत हे।
घुमर घुमर के..........२

भोले बाबा ल जाके मनावय,सोला सावन सम्मार के।
धथुरा पाना फूल फर संग,बेल पतिया ल वार के।
काँवरिया मन काँवर काँवर,गंगा जल ल चढ़ावत हे।
घुमर घुमर के..........३

तोषण कुमार चुरेन्द्र

बेटा किसान

बेटा किसान।
भाग के जगइय्या।
हावै महान।

करे तैयारी।
निहारत बदरा।
खेती हे पारी।

कुकरा बासे।
उठना गा भइय्या।
बेरा उगासे।

होत बिहान।
हे बइला नाँगर।
चले किसान।

चटनी बासी।
होवत मंझनिया।
मिटे थकासी।

कथे सियान।
तन मन बलवान।
जय किसान।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

रविवार, 25 जून 2017

बरसात

झिमिर-झिमिर पानी गिरय,मोर गाँव के खार।
तरिया-नरवा बड़ भरय,बुड़य खेत अउ पार।।

शनिवार, 24 जून 2017

प्राकृतिक आपदाएं

*हाइकु मञ्जुषा ४९*
*विषय :-प्राकृतिक आपदाएं*

*१.आंधी*

आंधी प्रकृति।
अरियों का दमन।
मिटे विकृति।

*२.रेतीली आंधी*

क्रोधित वात।
लाई रेतीली आंधी।
बन सवालात।

*३.तूफान*

आया तूफान।
सहमें थलचर।
मन हैरान।

*४.बाढ़*

बाढ़ ग्रसित।
था उत्तराखंड।
मन द्रवित।

*५.भूकंप*

आता भूकंप
धरणी विचलित।
लो हड़कंप।

*६.अकाल*

वारि अकाल।
घनघोर बारिश।
हे!महाकाल।

*७.सुनामी*

उठी लहर।
बनकर सुनामी।
ढाया कहर।

*८.भूस्खलन*

सदियों बाद।
केदार भूस्खलन।
फिर आबाद।

*९.ज्वालामुखी*

घोर वलय।
भड़के ज्वालामुखी।
महाप्रलय।

*१०.प्रलय*

न हो प्रलय।
रक्ष पर्यावरण।
करें प्रणय।

*तोषण कुमार चुरेन्द्र*

साधना

करलव जुरमिल साधना,धरव छन्द के ध्यान।
बनके साधक छन्द के, बगरावव  सब ग्यान।।

छंद साधना साधलव,बनके साधक आज।

गढ़लव सुग्घर छंद ला,आखर खोलय राज।

शुक्रवार, 23 जून 2017

जनउला

जनउला

होवत बिहना झुमरथे,अँगना घर अउ खोर।
चिक्कन चाँदन देखले,हाथ परत गा जोर।

बाहरी(झाड़ू )

कलाकार

कलाकार ना देखना,देखो उनके काम।
रहते परदे में सदा,करे काम निष्काम ।।

परवान

ना वेद पढूँ कुरान पढूँ।
ना मैं कोई अजान गढूँ।
इंसान हूँ  मैं इंसान बनूँ,
अंबर तक परवान चढूँ।

माँस

*माँस माँस सब एक है,क्या मछली क्या गाय।*
*बनकर दानव जो इन्हें,बड़े चाव से खाय।।*
😢😢💐💐💐

राम के नाम

राम के नाम हावय सार,करथे गा सबके उद्धार
सुमरन करले तैंहर संगी,सियाराम लगाही पार

लख चौरासी भटक भटक के ,मानुस तन ला पाए
चारेच दिन के चटक चँदैनी ,माया म गजब सनाए
भजले तैहर शबरी जइसन,तरजबे तँय संसार
राम के नाम......

सावन आगे

तोर मया मोर अंतस भीतरी बदरा बरोबर छागे
आजा अब तो मोर मयारु देखना सावन आगे

पपीहा बोलय कुहके कोयली गावै गीत मल्हार
करत  निहोरा बइठ सारी रतिहा चंदा चँदैनी जागे

होवत बिहनिया तोर गोरी आथे अड़बड़ सुरता
दिख जातिस कहूँ तोर चेहरा तन के सुस्ती भागे

काबर हावस नराज मोर ले बोली मया के बोल
मरम जिया के खोल तैंहर का दुख जेमा हमागे

तारीफ मेरी

तारीफ़ मेरी।
      परवरदीगार।
           जिंदगी तेरी।

है अरदास।
     खुशियाँ ही खुशियाँ ।
           हो मधुमास।

प्रकृति प्रेम ।
     आह्लादित चमन।
           कुशलक्षेम।

भीगे यौवन।
      सावन की फुहार।
           रश्मी सौतन।

नाम तोषण।
      अध्यापन कारज।
             करे पोषण।

बेटा किसान

बेटा किसान।
भाग के जगइय्या।
हावै महान।

करे तैयारी।
निहारत बदरा।
खेती हे पारी।

कुकरा बासे।
उठना गा भइय्या।
बेरा उगासे।

होत बिहान।
हे बइला नाँगर।
चले किसान।

चटनी बासी।
होवत मंझनिया।
मिटे थकासी।

कथे सियान।
तन मन बलवान।
जय किसान।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

सीखना

पढ़ा लिखा ज्यादा नहीं,ना कुछ मुझमें ग्यान।
कोशिश करता सीखना,गावे जो वेद पुरान।

गुरुवार, 22 जून 2017

साधना

खवइ  पियइ  रखलव बने,झन नेवतिहव रोग।
जिनगी बड़ अनमोल हे,करलव सब झन योग।।

बनके साधक साधलव,रचलव गा सब छन्द ।
सरस्वती के साधना,मिलय जुलय हर बन्द।।

योग

योग

रहें निरोग।
संयमित जीवन।
करलें योग।

योग की माया।
निखरित यौवन।
इच्छित काया।

एकाग्र मन।
हितकारिणी योग।
करें चिंतन।

अरुणोदय।
सूर्य नमस्काराय।
हो भाग्योदय।

तेजस कांति।
योग मय जीवन।
मिटती भ्रांति।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

मंगलवार, 20 जून 2017

बेत

बेत रूख  बँसरी  बने, मधुर  सुनावय  तान।
छोड़ अपन पहिचान ला,जग मा पावय मान।।


बँसरी के धुन नाच तँय,राधा बनके आज।

बन बनवारी तोर बर,साजँव सोला साज।।

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...