बेत रूख बँसरी बने, मधुर सुनावय तान।
छोड़ अपन पहिचान ला,जग मा पावय मान।।
बँसरी के धुन नाच तँय,राधा बनके आज।
बन बनवारी तोर बर,साजँव सोला साज।।
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...
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