बुधवार, 28 जून 2017

झुमर झुमर के

झुमर झुमर के बरसय पानी,मन मोर अड़बड़ नाचत हे।
घुमर घुमर  के आवय बदरा,संग पवन झकोरा मारत हे।

अधिया गेहे अषाढ़ महिना,पानी के अभी फुहार पड़े।
करिस अगोरा सब किसान मन,करे किसानी बर जोरा करे।
नाँगर बइला कमरा खुमरी,लउठी तुतारी सँवारत हे।
घुमर घुमर के.........१

होवत बिहनिया भुँइया के बेटा,दाई के सेवा बजावय।
हरिहर हरिहर धनहा डोली, लहर लहर लहरावय।
सावन महिना पाख अमावस,तिहार हरेली मनावत हे।
घुमर घुमर के..........२

भोले बाबा ल जाके मनावय,सोला सावन सम्मार के।
धथुरा पाना फूल फर संग,बेल पतिया ल वार के।
काँवरिया मन काँवर काँवर,गंगा जल ल चढ़ावत हे।
घुमर घुमर के..........३

तोषण कुमार चुरेन्द्र

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...