गुरुवार, 29 जून 2017

दुनिया

*होता ना जो चार कदम आगे दुनिया से "तोषण"*
*दुनिया जो है मुझे आठ कदम पीछे धकेल देती**

*जाग उठा शैतान अब गहरी रात के अँधेरों में*
*बचना है तो ढुँढ लो मेरे दुश्मनों का दर कहीं**

तोषण कुमार चुरेन्द्र

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