जिनगी में कभू घमंड झन करबे "तोषण" माटी के बने हस माटी म मिलबे।
पिया मिलन निहारती पलकें प्रेम अगन
तोषण कुमार चुरेन्द्र
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...
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