बताएँ क्या हम अपनी दिल की दास्तान को
प्यासी धरती देखे जैसे ऊपर आसमान को
आरजू है बस उनसे आखिरी मुलाकात की
लगे न नजर किसी की मेरे दिले अरमान को....
तोषण कुमार चुरेन्द्र
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...
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