परम आदरणीय श्री गुरूदेव संजय कौशिक "विज्ञात" जी जन्मदिन की बधाई व शुभाशया के संग एक कुण्डलियाँ समर्पित...
अपनी वाणी से कभी,करे नहीं आघात।
अतुलनीय जो है सदा,हैं कवि रवि विज्ञात।
हैं कवि रवि विज्ञात,रौशनी भरते मग में।
मिले मान सम्मान, सदा ही कलयुग जग में।
कह तोषण कर जोड़,पड़े माला नित जपनी।
मिले गुरू विज्ञात,वाह रे किस्मत अपनी।
तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
डौंंडी लोहारा बालोद छ.ग.
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें