छत्तीसगढ़ी कुण्डलियाँ
आनी बानी रंग हे,
घोर-घोर के घोर।
बइरी मन हर देख के,
नाचे मुड़ चिभोर।
नाचे मुड़ चिभोर,
थाप सुनके नंगारा।
दुरिहा इरषा होय,
रहे गा भाईचारा।
रंगव सातो रंग,
बचाके संगी पानी।
भजिया गुजिया संग,
चुरे खइ आनी बानी।
तोषण धनगंइहा
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