रविवार, 18 जून 2017

श्मसाँ मिल गया

किसी को जमीं किसी को आसमाँ मिल गया,
हम ही थे इक हैवाँ जो बस श्मसाँ मिल गया।
तोषण कुमार चुरेन्द्र

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