सुप्रभातम्
शुरुवात
सुरा के साथ
*गर शराब मिटाता दिल के सारे गम*
*तो मेरी दुनिया इतनी गमगीन न होती*
त़ोषण कुमार चुरेन्द्र:
आबाद होता देखा नहीं हमने किसी को जमाने में
सवेरे से जाकर जो डुबे रहते हम हैं बुरे मयखाने में
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...
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