रविवार, 21 मई 2017

मयखाना

सुप्रभातम्
शुरुवात
सुरा के साथ

*गर शराब मिटाता दिल के सारे गम*
*तो मेरी दुनिया इतनी गमगीन न होती*

त़ोषण कुमार चुरेन्द्र:

आबाद होता देखा नहीं हमने किसी को जमाने में
सवेरे से जाकर जो डुबे रहते हम हैं बुरे मयखाने में

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