बुधवार, 6 नवंबर 2019
खोपा के गजरा
सोमवार, 4 नवंबर 2019
करमा गीत
#लडका
करमा नचाहूं तोला ओ आना मादर के थाप मा
#लड़की
करमा नचादे मोला गा आना मादर के थाप मा
#लड़का
धान लुए हंसिया गजब उड़ाय कंशी
सुध मा तोर खोके मन बजावय बंशी
करमा नचाहूं तोला ओ आना मादर के थाप मा
#लड़की
करमा नचादे मोला गा आना मादर के थाप मा
#लड़की
आए ला सावन रिमझिम परे फोहार
बन बन किजरौं मैं पारत हँव गोहार
करमा नचादे मोला गा आना मादर के थाप मा
#लड़का
करमा नचाहूं तोला ओ आना मादर के थाप मा
#लडका
सुघ्घर लागे रानी हांसी तोर ठिठोली
कजरेली नैना ले मारे मया गोली
करमा नचाहूं तोला ओ आना मादर के थाप मा
#लड़की
करमा नचादे मोला गा आना मादर के थाप मा
#लड़की
धिक धिनिंधा मादर बाजे करमा के ताल
तोर मया म होगेंव बही हाल हे बेहाल
करमा नचादे मोला गा आना मादर के थाप मा
#लड़का
करमा नचाहूं तोला ओ आना मादर के थाप मा
#लड़का_लड़की
करमा नचाहूं तोला ओ आना मादर के थाप मा
करमा नचादे मोला गा आना मादर के थाप मा
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा
डौंडीलोहारा
बालोद छत्तीसगढ़ ९६१७५८९६६७
रविवार, 20 अक्टूबर 2019
मिट्टी का दीपक
जब तक जलता रहूँगा जग में, ज्योति मिलेगी मुझसे ही।
होता जीवन सब प्रकाशित और अंधेरा मुझसे ही।
साथ मिले जो सबका मुझको,मैं भी साथ निभाऊँगा।
बनकर दीपक बाती संग मैं,तम को भी जीत जाऊँगा।
बन जाए अनमोल ये जीवन,हो जाये जग नाम अमर,
दीपदान कर अपने वतन पे,कर्ज चुका दे इस मिट्टी की।
बनकर ऊर्जा तेरे भाल पर,मिट्टी से तिलक लगाऊँगा।
बनकर दीपक बाती संग मैं,तम को भी जीत जाऊँगा।
मेरे बिन हर आँगन सूना,रौशन हर द्वारे मिलता।
मेरी महत्ता मान लो सब,अपना वजूद जान लो सब,
मुझसे ही होता अरूणोदय,और मुझसे है पुष्प खिलता।
मुझको सब स्वीकार करलो,नित नया सवेरा लाऊँगा।
बनकर दीपक बाती संग मैं,तम को भी जीत जाऊँगा।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा
डौंडी लोहारा
९६१७५८९६६७
गुरुवार, 17 अक्टूबर 2019
सरस्वती बंदना
सरस्वती वंदना
मंगलवार, 10 सितंबर 2019
हवाई जहाज बनाऊँगा मैं।
कर भला तो हो भला
एक दिन ईश्वर चंद नाम का एक सज्जन व्यक्ति को ट्रेन से कहीं जाना था।जो जोकि साफ्टवेयर इंजीनियर है । "चलो जूते को चमकाया जाये" ऐसा सोचकर इधर उधर देखने लगा तो नजर शैलेष पर पड़ी। पास जाकर जूते पालीश करवाते शैलेष के बारे में पूरी जानकारी पता करने लगा।
"तुम्हारा क्या नाम है?पढ़ने क्यों नही जाते?तुम्हारे माता पिता आदि आदि?" ईश्वरचंद ने पूछा। "पढ़ाई कैसे करूँ साहब,पिता जी भगवान को प्यारे हो गये,माँ बीमार है सो उनकी परवरिश के लिए कुछ तो काम करना पड़ेगा न साहब।"शैलेष ने जवाब दिया। इन सारी बातों को सुनकर ईश्वर चंद की आखें भर आई।और अपने बीते दिनों को याद करने लगा कि "मैं भी कभी शैलेष की तरह छोटी मोटी मजदूरी करके अपना जीवन बसर करता रहा।इसकी तो माँ है मेरी तो माँ भी नही थी।लेकिन जैसे तैसे पढा़ई पूरी करके आज इस मुकाम तक पहुंच पाया।" "लो साहब जूता पालीश हो गया" आवाज सुनकर ईश्वर चंद का ध्यान टुटा।
उसने कहा"चलो शैलेष आज से तुम्हें काम करने जरूरत नहीं पड़ेगी,मैं तुम्हें एक अच्छे स्कूल में दाखिला दिलाऊँगा। और माँ को अपने साथ रखकर उसका इलाज भी करवाऊँगा।" शैलेष की आँखे भर आई ईश्वर चंद की बाते सुनकर।
ईश्वर चंद अपने ट्रेन का सफर रद्द करके शैलेष और उसकी माँ लेकर घर ले आया। ईश्वर चंद एक बेटा बनकर माँ का ईलाज शुरू कर दिया ।जल्द ही माँ भी ठीक हो गई। शैलेष का अच्छे स्कूल में दाखिला हुआ।
ईश्वर चंद के इस तरह के कार्य को देखकर माँ के मुख से यही आशीर्वाद निकला- "भगवान तुम्हें लंबी उम्र दे।जिस तरह तुने हमारा भला किया है,उसी तरह भगवान भी तुम्हारा भला करे।दुधो नहाओ पूतो फलो।"
ईश्वर चंद की आँखें खुशियों से भर आई।और एक टक माँ को देखने लगा।
"धनगंइहा"
शुक्रवार, 6 सितंबर 2019
गणपति वंदना
बुधवार, 4 सितंबर 2019
राम
कृपा करे श्री राम जी,मिले अजब सौगात।।
बनके निशदिन दास जो,रखते प्रभु का मान।।
सीता के हे प्राण पति,सदा करो कल्याण।।
बसते शंकर के हृदय, जपे काल के काल।।
तोषण माँगे वर सदा,चरण झुके बस माथ।।
"धनगंइहा"
सोमवार, 2 सितंबर 2019
गणेश वंदना
गणपति तुम्हें प्रणाम करूँ।
दे दो बुद्धि हमें विनायक,
नित निरतंर जीत करूँ।
निशदिन तेरा ध्यान करूँ।
रिद्धि सिद्धि बुद्धि के दाता,
सब दुखियन के दुख हरूँ।
पार्वती के लाल हो।
पहिली पूजा होती तेरी,
देवो में देव कमाल हो।
करे परिक्रमा सात।
गणों के देव हो तुम देवा,
कहलाये गणराज।
लीला अजब दिखाते।
देख देख मात पिता संग
जग सारे हर्षाते।
लीला तेरी न्यारी।
जग में होती पूजा पहले,
मूषक तेरी सवारी।
रख दो मेरी लाज।
सभी सुखी रहे जग में,
कहूँ कर जोड़ आज।
"धनगंइहा"
शनिवार, 31 अगस्त 2019
ईश वंदना
खींचे गांजा एक दम,
अंग में भभूति सोहे,
दूज चंदा माथ में।
वामंग बिराजे सती,
गणपति साथ में।
परहित जीने वाले,
नीलकंठ बन गये,
विष लिए हाथ में।
मेरी नाव पार करो,
खड़ा मैं हूँ बाट में।
"धनगंइहा"
शुक्रवार, 30 अगस्त 2019
बहना का प्यार
इधर सुनीता भी आज मन ही मन गुनगुना रही है कि आज भैय्या मेरा तीज के लिए लिवाने आने वाला है।मुंडेर पें कौआ कांव-कांव करते संदेशा सुना रहा है।पंछी की कलरव भी मन को भा रही है।
सुनीता भैय्या के आने का इंतजार कर रही थी।तभी.... फोन की घंटी बजी।संदेश आया कि तेरा भैय्या अस्पताल में भर्ती है जल्दी से आ जाओ।
संदेश मिलते ही दंग रह गयी।"हे भगवान! सोचा क्या और क्या हो गया?" सुनीता सोचने लगी। जैसे तैसे बहना अस्पताल पहुंची।भैय्या को देखा ।सुकुन की साँस ली कि ज्यादा चोटें नही आईं।कहने लगी "क्या भैय्या !धीरे चलाना चाहिए न!तुम्हें कुछ हो जाता तो...?"
"जब तक तेरी जैसी बहन मेरे साथ है तो मुझे कुछ भी नही हो सकता।" किसन ने कहा।
"इस साल तीज में भोलेनाथ से अपने पति अपने बच्चों की सलामती के साथ-साथ तेरे लिए भी दुआ मागूँगी कि तू सदा खुश रहे ।तुम्हें दुनिया में कोई तकलीफ न हो।" सुनीता ने कहा।
किसन एक टक अपनी बहन को देखता रहा।
"धनगंइहा"
सरगम
गीत मिलन की छेड़ दे हिया के पट खोल
सावन की पुरवाई बाँधे तुझ संग प्रीत की डोर
आजा बसंत बहार में ले कोयल की बोल....
मिल जाए एक झलक देखूँ तुझे जो भोर
मेरे हिय के प्रेम को प्रेम तुला से अब तोल....
'धनगंइहा'
गुरुवार, 29 अगस्त 2019
ईश वंदना
कब आओगे मोहना,बसी नयन में आस।।
मेरो मन करता जयकारो।
मुरलीधर तुम नाग नँथायो।
राधे रानी के मन भायो।
गोपाला केशव बहुते नामा।
आना माधव अपनो ग्रामा।
मीत सुदामा तोहे प्यारा।
जानत हर कोई जग सारा।
दे दीजै प्रभु यह वरदाना ।
सकल जगत हो आप समाना।
आओ नटवर धीर बँधाओ।
फिर एक बार गीता गाओ।
आजा गिरधर लौट के,फिर राधा के ग्राम।।
"धनगंइहा"
ईश वंदना
प्यार करता हूँ
जानें नहीं कभी मैं प्यार करता हूँ।
अपनी झुकी निगाहें चार करता हूँ।
खुद को कभी-कभी बीमार करता हूँ।
तेरे लिए जहाँ गुलजार करता हूँ।
इश़्की जुबाँ अभी इजहार करता हूँ।
"धनगंइहा"
बुधवार, 28 अगस्त 2019
अंत्याक्षरी
भारत के प्यारे जागव
देश के रखवारे जागव
बइरी दुवारे आवय
तुम सिर उतारव जागव
शिवाजी मनु मर्दानी
आजाद भगत के टोली
सुनले तैं अमर कहानी
भुजा फड़कालव जागव
आगी भड़कालव जागव...
बइरी दुवारे आवय...
करव लड़े के तइयारी
थर्र खावय जम्मो बइरी
जानय ये दुनिया सारी
रण के बाकुरों जागव
जग के दुलारों जागव....
बइरी दुवारे आवय.....
बाधा कतको हे पथ मे
फौलाद करेजा रखलव
दंभ भरव पग-पग में
दाई के ललना जागव
भरके हुंकार जागव....
बइरी दुवारे आवय......
हर लेवव सब दुख पीरा
भारत माता के दुलरवा
बहिनी के भइय्या वीरा
रक्षा के सूंत बधावव
मिलके सब फरज निभावव....
बइरी दुवारे आवय....
बन जा तैं बघवा मानव
दुसमन के छक्का छूटय
भाग जावय अबके दानव
तिरंगा थामव जावव
जयहिंद सब मिलजुल गावव...
बइरी दुवारे आवय....
डौंडी लोहारा बालोद
दोहालरी
मुखिया अपने गाँव में,
आन बसे है तीन।
अपनी ही बस हाँकते,
लाख बजा लो बीन।
कारज कितना भी भला,
सही मिले ना दाम।
रखते ऐसी चाहतें,
अच्छा हो परिणाम।।
खाना ही दोगे नही,
कैसे लोगे काम।
समझो ना अब तुम यहाँ,
अपने को गुलफ़ाम।।
राजा अपने दास को,
समझे कोल्हू बैल।
तन मन धन शोषण करे,
पेर निकाले तैल।।
आने का है भान सब,
जाने का ना लेख।
अपना भी परिवार है,
घर पर जाकर देख।।
मीठा मीठा बोलके,
मन को लेते फाँस।
रखलें अपनी बात तो,
टाल देत है हाँस।
अपनी टोली में सभी,
रखते मुँह को बंद।
सुनके ही रह जात हैं,
करके नाड़ी मंद।।
खून पसीने सींचते,
देते विद्या दान।
समझें इनकी भावना,
दें नव वेतन मान।।
पेट अगर होगा भरा,
मुख से निकले वाह।
लात पड़े जो पेट में,
निकले दिल से आह।।
धन तो है मिलता नहीं,
मिलता केवल मान।
भूखा रहके हम मरें,
नहीं किसी को भान।।
लक्ष्य गर मिलता नहीं,
बदलें अपनी राह।
पा जाओगे साथियों,
जो है मन में चाह।
राम नाम
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...
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"पाँच बातें " पाठ - 14 "पाँच बातें " कक्षा - 4 1- हर एक काम इमानदारी से करो ! 2- जो भी तुम्हारा भला करे, उसका कह...
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हरा भरा खलिहान,संस्कृति की पहचान, परब हरियाली का,बड़ा ही निराला है!! महीना है सावन का,जय हो भोलेनाथ की, छोड़छाड़ अमृत को,पिए विष हाला है!...
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लोहारा के तीर मा,सुग्घर साँई ठाँव. किरपा करथे हाथ ले,लेवव जुरमिल नाँव. पानी ले दीया जरे,महिमा अपरम्पार. जय हो साँई नाथ के,करल...
















