बुधवार, 6 नवंबर 2019

खोपा के गजरा

समीक्षार्थ

सरसी छंद

खोपा के गजरा मन भावय,पवन करत हे सोर।
नदिया नरवा देवय ताना,झूमय नाचय मोर।।1।।

बेनी झूलय कनिहा डोलय,महके गजरा फूल।
कर डारे हे बइहा पगला,लहरे अचरा तोर।।2।।

झूलत रहिथे तोरे चेहरा,आँखी आँखी तीर।
मर जाहूँ किरिया हे तोला,बाँधे पीरित डोर।।3।।

मुच मुच हाँसी मोला मोहे,कोयल जइसन गोठ।
भाथे तोला देखे- देखे,मारे हिय हिलोर।।4।।

करले जोरा अब तै गोरी,ले के आहूँ कार।
ले जाहूँ भँवरा के तोला,कर लेबे सिंगार चोर।।5।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

गीत राम के गावव


समीक्षार्थ

सार छंद

गीत राम के गावव संगी,पियो राम के प्याला।
उठत राम के सुरता आथे,मोर राम रखवाला।।
राम बताही सबला रद्दा,चरन माँथ टेकावव।
बिना राम जिनगी हे बिरथा,नेति नेति गुन गावव।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा,डौंडी लोहारा


सोमवार, 4 नवंबर 2019

करमा गीत

समीक्षार्थ
करमा गीत
*मुखड़ा*
‪#‎लडका‬
करमा नचाहूं तोला ओ आना मादर के थाप मा
‪#‎लड़की‬
करमा नचादे मोला गा आना मादर के थाप मा
*अंतरा 1*
‪#‎लड़का‬
धान लुए हंसिया  गजब उड़ाय कंशी
सुध मा तोर खोके मन बजावय बंशी
करमा नचाहूं तोला ओ आना मादर के थाप मा
#लड़की
करमा नचादे मोला गा आना मादर के थाप मा
*अंतरा 2*
#लड़की
आए ला सावन रिमझिम परे फोहार
बन बन किजरौं मैं पारत हँव गोहार
करमा नचादे मोला गा आना मादर के थाप मा
#लड़का
करमा नचाहूं तोला ओ आना मादर के थाप मा
*अंतरा 3*
#लडका
सुघ्घर लागे रानी हांसी तोर ठिठोली
कजरेली नैना ले मारे मया गोली
करमा नचाहूं तोला ओ आना मादर के थाप मा
#लड़की
करमा नचादे मोला गा आना मादर के थाप मा
*अंतरा 4*
#लड़की
धिक धिनिंधा मादर बाजे करमा के ताल
तोर मया म होगेंव बही हाल हे बेहाल
करमा नचादे मोला गा आना मादर के थाप मा
#लड़का
करमा नचाहूं तोला ओ आना मादर के थाप मा
*संघरा*
‪#‎लड़का_लड़की‬
करमा नचाहूं तोला ओ आना मादर के थाप मा
करमा नचादे मोला गा आना मादर के थाप मा
गीत ‪
तोषण‬ कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा
डौंडीलोहारा
बालोद छत्तीसगढ़ ९६१७५८९६६७


रविवार, 20 अक्टूबर 2019

मिट्टी का दीपक

मिट्टी का है स्वरूप मेरा, मिट्टी में ही मिल जाऊँगा।
बनकर दीपक बाती संग मैं,तम को भी जीत जाऊँगा।

मुझसे ही आदि जगत की, और अंत भी मुझसे ही।
     जब तक जलता रहूँगा जग में, ज्योति मिलेगी मुझसे ही।
            है जितनें संसार में प्राणी सबमें एक ही ज्योति,
                  होता जीवन सब प्रकाशित और अंधेरा मुझसे ही।
                       साथ मिले जो सबका मुझको,मैं भी साथ निभाऊँगा।
                           बनकर दीपक बाती संग मैं,तम को भी जीत जाऊँगा।


 मिट्टी का दीप जान न मुझको,जीवन अपनी मिट्टी की।
      दीपक लेकर करले पूजा,मातृभूमि सबकी मिट्टी की।
             बन जाए अनमोल ये जीवन,हो जाये जग नाम अमर,
                   दीपदान कर अपने वतन पे,कर्ज चुका दे इस मिट्टी की।
                         बनकर ऊर्जा तेरे भाल पर,मिट्टी से तिलक लगाऊँगा।
                              बनकर दीपक बाती संग मैं,तम को भी जीत जाऊँगा।


हर घर हर चौराहे पे दिखता,हर गली बाजार पे बिकता।
    मेरे बिन हर आँगन सूना,रौशन हर द्वारे मिलता।
         मेरी महत्ता मान लो सब,अपना वजूद जान लो सब,
              मुझसे ही होता अरूणोदय,और मुझसे है पुष्प खिलता।
                    मुझको सब स्वीकार करलो,नित नया सवेरा लाऊँगा।
                          बनकर दीपक बाती संग मैं,तम को भी जीत जाऊँगा।

रचना
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा
डौंडी लोहारा
९६१७५८९६६७



गुरुवार, 17 अक्टूबर 2019

सरस्वती बंदना


मोर मुड़ी मा आके रखदे हाथ ओ मोर शारद मैय्या
मोर शारद मैय्या.......


ज्ञान के जोति दाई सबला तै देखाये
सुर के देवैय्या दाई बीना ला बजाये
मोला बीना के तै दे दे झनकार ओ 
मोर शारद मैय्या......


भरे सभा मा मैय्या तोला गोहरावंव
चरन मा तोर देवी माथ ला नवावंव
आजा सभा मा तै रखदे लाज ओ
मोर शारद मैय्या.....


तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा


सरस्वती वंदना

हे मैय्या ज्ञान के देवैय्या मैय्या शारदे
ज्ञान दे ज्ञान दे........

सुर के देवैय्या सरसतिया.....
हे मैय्या......



ज्ञान देवैय्या सरसती मैय्या तोर चरण मा आयेंव
तोर दया ले तोर मया ले ज्ञान ला जग बगरायेंव
ज्ञान दे ज्ञान दे........



तोरेच दिये बानी पायेंव तोरेच दिये भाखा
तोरेच दिये राग ला गायेंव तोरेच दिये गाथा
ज्ञान दे ज्ञान दे..........



तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा


मंगलवार, 10 सितंबर 2019

हवाई जहाज बनाऊँगा मैं।

छोटी सी बालमन की कविता

हवाई जहाज बनाऊँगा मैं।
नीले अम्बर में जाऊँगा मैं।
नभ मंडल की सैर करूँगा,
फिर घर वापस आऊँगा मैं।


सूरज चाचा से बातें होंगी।
चंदा मामा संग रातें होंगी।
सभी ग्रहों से दोस्ती करके,
तारों संग मुलाकातें होंगी।


धुएँ कारखानें वहाँ न होगी।
निर्मल शुद्ध हवाएँ होगी।
पान करूँगा हरपल हरदिन, 
रहेगा हमेशा तन ये निरोगी।


मोटर गाड़ी बहुत है चलते।
कितनों राही हैं जीते मरते।
इन सबसे मुझे मुक्ति मिलेगी,
लोग रहेंगे सदा ही तकते।


होगी अब ऊपर मेरी उड़ान।
बनेगा जब ये मेरा वायुयान।
चुन्नु,मुन्नु,पोषण,तोषण,
घुमेंगे नभ में सब सीना तान।


तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"


कर भला तो हो भला


*कर भला तो हो भला*

                                         पढ़ने के शौकीन शैलेष10 साल के उम्र  में रेल्वे स्टेशन पर आने जाने वाले लोगों के जूते पालीश करता ।जो भी कमाई होती बीमार माँ की दवाई और खाने पीने के सामान जुटाता । 

                                         एक दिन ईश्वर चंद नाम का एक सज्जन व्यक्ति को ट्रेन से कहीं जाना था।जो जोकि साफ्टवेयर इंजीनियर है । "चलो जूते को चमकाया जाये" ऐसा सोचकर इधर उधर देखने लगा तो नजर शैलेष पर पड़ी। पास जाकर जूते पालीश करवाते शैलेष के बारे में पूरी जानकारी पता करने लगा। 

                                     "तुम्हारा क्या नाम है?पढ़ने क्यों नही जाते?तुम्हारे माता पिता आदि आदि?" ईश्वरचंद ने पूछा। "पढ़ाई कैसे करूँ साहब,पिता जी भगवान को प्यारे हो गये,माँ बीमार है सो उनकी परवरिश के लिए कुछ तो काम करना पड़ेगा न साहब।"शैलेष ने जवाब दिया। इन सारी बातों को सुनकर ईश्वर चंद की आखें भर आई।और अपने बीते दिनों को याद करने लगा कि "मैं भी कभी शैलेष की तरह छोटी मोटी मजदूरी करके अपना जीवन बसर करता रहा।इसकी तो माँ है मेरी तो माँ भी नही थी।लेकिन जैसे तैसे पढा़ई पूरी करके आज इस मुकाम तक  पहुंच पाया।" "लो साहब जूता पालीश हो गया" आवाज सुनकर ईश्वर चंद का ध्यान टुटा।

                                      उसने कहा"चलो शैलेष आज से तुम्हें काम करने जरूरत नहीं पड़ेगी,मैं तुम्हें एक अच्छे स्कूल में दाखिला दिलाऊँगा। और माँ को अपने साथ रखकर उसका इलाज भी करवाऊँगा।" शैलेष की आँखे भर आई ईश्वर चंद की बाते सुनकर।

                                     ईश्वर चंद अपने ट्रेन का सफर रद्द करके शैलेष और उसकी माँ लेकर घर ले आया। ईश्वर चंद एक बेटा बनकर माँ का ईलाज शुरू कर दिया ।जल्द ही माँ भी ठीक हो गई। शैलेष का अच्छे स्कूल में दाखिला हुआ।

                                    ईश्वर चंद के इस तरह के कार्य को देखकर माँ के मुख से यही आशीर्वाद निकला- "भगवान तुम्हें लंबी उम्र दे।जिस तरह तुने हमारा भला किया है,उसी तरह  भगवान भी तुम्हारा भला करे।दुधो नहाओ पूतो फलो।"

                                      ईश्वर चंद की आँखें खुशियों से भर आई।और एक टक माँ को देखने लगा।

                                                                                                                  तोषण कुमार चुरेन्द्र
                                                                                                                        "धनगंइहा"


शुक्रवार, 6 सितंबर 2019

गणपति वंदना


नन्हें नन्हें हाथ जोड़कर,
गणपति तुम्हें प्रणाम करूँ।
दे दो बुद्धि हमें विनायक,
नित निरतंर जीत करूँ।


बिल्व पत्र मैं तुम्हें चढ़ाऊँ,
निशदिन तेरा ध्यान करूँ।
रिद्धि सिद्धि बुद्धि के दाता,
सब दुखियन के दुख हरूँ।


मोदक तुमको लगते प्यारे,
पार्वती के लाल हो।
पहिली पूजा होती तेरी,
देवो में देव कमाल हो।


माता पिता को माने जगत,
करे परिक्रमा सात।
गणों के देव हो तुम देवा,
कहलाये गणराज।


नंदी भृंगी संग खेले कूदे,
लीला अजब दिखाते।
देख देख मात पिता संग
जग सारे हर्षाते।


एकदंत दयावंत हो देवा,
लीला तेरी न्यारी।
जग में होती पूजा पहले,
मूषक तेरी सवारी।


कामना मेरी हो पूरी,
रख दो मेरी लाज।
सभी सुखी रहे जग में,
कहूँ कर जोड़ आज।


तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"

बुधवार, 4 सितंबर 2019

राम

दोहा

मेरे रघुवर राम की,बड़ी निराली बात।
कृपा करे श्री राम जी,मिले अजब सौगात।।

हनुमत जिनके भक्त है,धरे हृदय में ध्यान।
बनके निशदिन दास जो,रखते प्रभु का मान।।

दशरथ नंदन हो प्रभु,करूँ सदा गुणगान।
सीता के हे प्राण पति,सदा करो कल्याण।।

कैकेयी के लाडले,कौशिल्या के लाल।
बसते शंकर के हृदय, जपे काल के काल।।

माया के संसार में,रहे हमेशा साथ।
तोषण माँगे वर सदा,चरण झुके बस माथ।।


तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"


सोमवार, 2 सितंबर 2019

गणेश वंदना



नन्हें नन्हें हाथ जोड़कर,
गणपति तुम्हें प्रणाम करूँ।
दे दो बुद्धि हमें विनायक,
नित निरतंर जीत करूँ।
                                बिल्व पत्र मैं तुम्हें चढ़ाऊँ,
                                निशदिन तेरा ध्यान करूँ।
                                रिद्धि सिद्धि बुद्धि के दाता,
                                सब दुखियन के दुख हरूँ।
मोदक तुमको लगते प्यारे,
पार्वती के लाल हो।
पहिली पूजा होती तेरी,
देवो में देव कमाल हो।
                               माता पिता को माने जगत,
                               करे परिक्रमा सात।
                               गणों के देव हो तुम देवा,
                               कहलाये गणराज।
नंदी भृंगी संग खेले कूदे,
लीला अजब दिखाते।
देख देख मात पिता संग
जग सारे हर्षाते।
                               एकदंत दयावंत हो देवा,
                               लीला तेरी न्यारी।
                               जग में होती पूजा पहले,
                               मूषक तेरी सवारी।
कामना मेरी हो पूरी,
रख दो मेरी लाज।
सभी सुखी रहे जग में,
कहूँ कर जोड़ आज।


तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"

शनिवार, 31 अगस्त 2019

ईश वंदना

*ईश वंदना*



बम बम बोल बम,
    खींचे गांजा एक दम,
       अंग में भभूति सोहे,
           दूज चंदा माथ में।

हिमाले पे डेरा रहे,
    गल नाग फेरा रहे,
          वामंग बिराजे सती,
               गणपति साथ में।

हलाहल पीने वाले,
   परहित जीने वाले,
        नीलकंठ बन गये,
            विष लिए हाथ में।

तेरी लीला न्यारी लागे,
    जग हितकारी लागे,
         मेरी नाव पार करो,
              खड़ा मैं हूँ बाट में।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"

शुक्रवार, 30 अगस्त 2019

बहना का प्यार

लघु कथा



*बहना का प्यार*

                                            बहन को तीज लिवाने के लिए किसन घर से मोटर सायकल लेके निकला।मन ही मन मुस्कुराते हुए जा ही रहा था कि अचानक.....पीछे से एक मोटर सायकल वाले ने तेज रफ्तार से आते हुए किसन को ठोकर मार दी।

                                           इधर सुनीता भी आज मन ही मन गुनगुना रही है कि आज भैय्या मेरा तीज के लिए लिवाने आने वाला है।मुंडेर पें कौआ कांव-कांव करते संदेशा सुना रहा है।पंछी की कलरव भी मन को भा रही है।

                                          सुनीता भैय्या के आने का इंतजार कर रही थी।तभी.... फोन की घंटी बजी।संदेश आया कि तेरा भैय्या अस्पताल में भर्ती है जल्दी से आ जाओ।

                                          संदेश मिलते ही दंग रह गयी।"हे भगवान! सोचा क्या और क्या हो गया?" सुनीता सोचने लगी। जैसे तैसे बहना अस्पताल पहुंची।भैय्या को देखा ।सुकुन की साँस ली कि ज्यादा चोटें नही आईं।कहने लगी "क्या भैय्या !धीरे चलाना चाहिए न!तुम्हें कुछ हो जाता तो...?"

                                           "जब तक तेरी जैसी बहन मेरे साथ है तो मुझे  कुछ भी नही हो सकता।" किसन ने कहा।

                                         "इस साल तीज में भोलेनाथ से अपने पति अपने बच्चों की सलामती के साथ-साथ तेरे लिए भी दुआ मागूँगी कि तू सदा खुश रहे ।तुम्हें दुनिया में कोई तकलीफ न हो।" सुनीता ने कहा।
                                         किसन एक टक अपनी बहन को देखता रहा।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"

सरगम



सरगम तेरी पायल की मेरे मन की बोल
गीत मिलन की छेड़ दे हिया के पट खोल


छम छम वन में नाचती देखते ही बादल मोर
सावन की पुरवाई बाँधे तुझ संग प्रीत की डोर
आजा बसंत बहार में ले कोयल की बोल....


मेरे मन की गजगामिनी मैं हूँ तेरा चितचोर
मिल जाए एक झलक देखूँ तुझे जो भोर
मेरे हिय के प्रेम को प्रेम तुला से अब तोल....


तोषण कुमार चुरेन्द्र
'धनगंइहा'

गुरुवार, 29 अगस्त 2019

ईश वंदना

माखन खाता नन्द घर,मधुबन करता रास।
कब आओगे मोहना,बसी नयन में आस।।
हाथ पसारे द्वार तिहारो।
मेरो मन करता जयकारो।
मुरलीधर तुम नाग नँथायो।
राधे रानी के मन  भायो।
गोपाला केशव बहुते नामा।
आना माधव अपनो ग्रामा।
मीत सुदामा तोहे प्यारा।
जानत हर कोई जग सारा।
दे दीजै प्रभु यह वरदाना ।
सकल जगत हो आप समाना।
आओ नटवर धीर बँधाओ।
फिर एक बार गीता गाओ।
तेरे दरशन की आस में,रोवत हैं बृज धाम।
आजा गिरधर लौट के,फिर राधा के ग्राम।।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"

ईश वंदना



माखन खाता नन्द घर,मधुबन करता रास।
कब आओगे मोहना,बसी नयन में आस।।


हाथ पसारे द्वार तिहारो।
मेरो मन करता जयकारो।

मुरलीधर तुम नाग नँथायो।
राधे रानी के मन  भायो।

गोपाला केशव बहुते नामा।
आना माधव अपनो ग्रामा।

मीत सुदामा तोहे प्यारा।
जानत हर कोई जग सारा।

दे दीजै प्रभु यह वरदाना ।
सकल जगत हो आप समाना।

आओ नटवर धीर बँधाओ।
फिर एक बार गीता गाओ।


तेरे दरशन की आस में,रोवत हैं बृज धाम।
आजा गिरधर लौट के,फिर राधा के ग्राम।।



तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"

प्यार करता हूँ

चोरी छिपे सही दीदार करता हूँ।
जानें नहीं कभी मैं प्यार करता हूँ।

देखे कभी नमी आँखें झलक से जो,
अपनी झुकी निगाहें चार करता हूँ।

तेरे हँसी लबों की चाहत मुझे है,
खुद को कभी-कभी बीमार करता हूँ।

माना मुझे नही आता मुस्कुराना,
तेरे लिए जहाँ गुलजार करता हूँ।

समझो नहीं कभी गूँगा बधिर हमको,
इश़्की जुबाँ अभी इजहार करता हूँ।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"


बुधवार, 28 अगस्त 2019

अंत्याक्षरी



अभ्यास की दृष्टि से सादर ....मंच पर

अवहेलना,

मत करना अवहेलना,कभी बड़ों की बात।
दुआ कभी मिलता नहीं,हो दिन चाहे रात।।


विवेचना,

करिए कर्म विवेचना,रखिए सदा ये ध्यान।
धन दौलत जब पास हो,ना रख कभी गुमान।।


व्याप्त,

गुण अवगुण सब व्याप्त है,यही जगत की रीत।
मीठी वाणी बोल के,सकल विश्व लो जीत।


आकंठ,

भरा हुआ आकंठ तक,सदा पतित में दंभ।
झुकना कभी न जानते,तने रहे बन खंभ।


ममता,

माँ की ममता को भला,आँक सके न कोय।
भरकर सुत के पेट को,खुद ही भूखी सोय।।


प्रलाप,

सुख दुख के इस खेल में,करते नहीं प्रलाप।
धैर्य मन में धारिए,मिट जाए संताप।।


लालसा,

त्यागें मन की लालसा,करें ईश का ध्यान।
धन दौलत साथी नहीं,रखिए इसका ज्ञान।।


वन्दना,

मातु पिता की वन्दना,करलें आठों याम।
जिनके पुण्य प्रताप से,बनते बिगड़े काम।।


चापलूस,

चापलूस के काम का,रहता जग में शोर।
बड़े-बड़े ठग जात हैं,क्या ठाकुर क्या चोर।।


झंझावत

आते झंझावत शाम जो,हिय में उठती आह।
पिया गये परदेश को,घर से तकती राह।।


तोषण कुमार चुरेन्द्र "धनगंइहा"

भारत के प्यारे जागव



भारत के प्यारे जागव
देश के रखवारे जागव
बइरी दुवारे आवय
तुम सिर उतारव जागव


झोंकय अपन जिनगानी
शिवाजी मनु मर्दानी
आजाद भगत के टोली
सुनले तैं अमर कहानी
भुजा फड़कालव जागव
आगी भड़कालव जागव...
बइरी दुवारे आवय...

सुते के नंइहे पारी
करव लड़े के तइयारी
थर्र खावय जम्मो बइरी
जानय ये दुनिया सारी
रण के बाकुरों जागव
जग के दुलारों जागव....
बइरी दुवारे आवय.....


ऊबाल भरव रग-रग में
बाधा कतको हे पथ मे
फौलाद करेजा रखलव
दंभ भरव पग-पग में
दाई के ललना जागव
भरके हुंकार जागव....
बइरी दुवारे आवय......


जागव मोर देश के हीरा
हर लेवव सब दुख पीरा
भारत माता के दुलरवा
बहिनी के भइय्या वीरा
रक्षा के सूंत बधावव
मिलके सब फरज निभावव....
बइरी दुवारे आवय....


भारत के  आन बचावव
बन जा तैं बघवा मानव
दुसमन के छक्का छूटय
भाग जावय अबके दानव
तिरंगा थामव जावव
जयहिंद सब मिलजुल गावव...
बइरी दुवारे आवय....


तोषन धनगंइहा
डौंडी लोहारा बालोद

दोहालरी


मुखिया अपने गाँव में,
      आन बसे है तीन।
अपनी ही बस हाँकते,
       लाख बजा लो बीन।

कारज कितना भी भला,
       सही मिले ना दाम।
रखते ऐसी चाहतें,
       अच्छा हो परिणाम।।

खाना ही दोगे नही,
       कैसे लोगे काम।
समझो ना अब तुम यहाँ,
       अपने को गुलफ़ाम।।

राजा अपने दास को,
       समझे कोल्हू बैल।
तन मन धन शोषण करे,
       पेर निकाले तैल।।

आने का है भान सब,
       जाने का ना लेख।
अपना भी परिवार है,
       घर पर जाकर देख।।

मीठा मीठा बोलके,
        मन को लेते फाँस।
रखलें अपनी बात तो,
        टाल देत है हाँस।

अपनी टोली में सभी,
        रखते मुँह को बंद।
सुनके ही रह जात हैं,
        करके नाड़ी मंद।।

खून पसीने सींचते,
        देते विद्या दान।
समझें इनकी भावना,
        दें नव वेतन मान।।

पेट अगर होगा भरा,
        मुख से निकले वाह।
लात पड़े जो पेट में,
        निकले दिल से आह।।

धन तो है मिलता नहीं,
        मिलता केवल मान।
भूखा रहके हम मरें,
        नहीं किसी को भान।।

लक्ष्य गर मिलता नहीं,
        बदलें अपनी राह।
पा जाओगे साथियों,
        जो है मन में चाह।

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...