माखन खाता नन्द घर,मधुबन करता रास।
कब आओगे मोहना,बसी नयन में आस।।
कब आओगे मोहना,बसी नयन में आस।।
हाथ पसारे द्वार तिहारो।
मेरो मन करता जयकारो।
मुरलीधर तुम नाग नँथायो।
राधे रानी के मन भायो।
गोपाला केशव बहुते नामा।
आना माधव अपनो ग्रामा।
मीत सुदामा तोहे प्यारा।
जानत हर कोई जग सारा।
दे दीजै प्रभु यह वरदाना ।
सकल जगत हो आप समाना।
आओ नटवर धीर बँधाओ।
फिर एक बार गीता गाओ।
मेरो मन करता जयकारो।
मुरलीधर तुम नाग नँथायो।
राधे रानी के मन भायो।
गोपाला केशव बहुते नामा।
आना माधव अपनो ग्रामा।
मीत सुदामा तोहे प्यारा।
जानत हर कोई जग सारा।
दे दीजै प्रभु यह वरदाना ।
सकल जगत हो आप समाना।
आओ नटवर धीर बँधाओ।
फिर एक बार गीता गाओ।
तेरे दरशन की आस में,रोवत हैं बृज धाम।
आजा गिरधर लौट के,फिर राधा के ग्राम।।
आजा गिरधर लौट के,फिर राधा के ग्राम।।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"
"धनगंइहा"
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