माहोल चुनाव बड़ छाए हे।
सबो समिति आगू आए हे।
मांग अड़बड़ हवय तिरपटहा,
प्रत्याशी के मति छरियाए हे।
जेन मिलथे सब काहत हे,
तुहीच ल देबोन वोट हम।
तोला रहिबोन सब चिनके,
फेर झिन करबे नोट कम।
जनता मन के चारो कोती,
हाथ दुनों अभी हरियाए हे।
मांग अड़बड़ हवय तिरपटहा,
प्रत्याशी के मति छरियाए हे।
आथे जब गाँव मा प्रत्याशी,
जनता ल गजब रिझाए बर।
देखा के अपन चुनाव चिनहा,
लगथे गा सुग्घर बताए बर।
बिना नोट के वोट नंइ मिले,
भीड़ लोगन नेता ल चेताए हे।
मांग अड़बड़ हवय तिरपटहा,
मति प्रत्याशी के छरियाए हे।
रीत हे देखव याहा कइसे ,
दानी ह लालची होवत हे।
अपन मत के दान करेबर,
ये पइसा खातिर रोवत हे।
गाँव समाज ल छोड़ सब,
अपनेच सुवारथ सधाए हे।
मांग अड़बड़ हे तिरपटहा,
मति प्रत्याशी के छरियाए हे।
गाँव के बढ़िहा विकास करय,
अइसन मुखिया बनावव जी।
मिलजुल के मोर संगी साथी,
गाँव ल सरग सजावव जी।
सच्चा ल चुनव अच्छा चुनव,
अतरी 'धनगंइहा' सोरियाए हे।
मांग अड़बड़ हे तिरपटहा,
मति प्रत्याशी के छरियाए हे।
माहोल चुनाव बड़ छाए हे।
सबो समिति आगू आए हे।
मांग अड़बड़ हवय तिरपटहा,
प्रत्याशी के मति छरियाए हे।
तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
उपाध्यक्ष, मधुर साहित्य परिषद
डौंडी लोहारा बालोद छ.ग.
२०/०१/२०२०
९५७५०७०६८९
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