*उम्मीदवार के ब्यथा*
सऊँख मोरो जी चर्राय राहय
जाके फारम फटले भरदेंव।
लड़हूँ महूँ चुनाव अब कहिके
गाँव भर मा ढिंढोरा करदेंव।।
बनेबर बर तो मैं बनगे हावँव
सरपंच पद उम्मीदवार मँय।
आगू पाछू मोर कोनों नंइ घूमय
कइसे के करिहँव परचार मँय।।
बीजा छीतेहँव धनहा डोली मा
पानी ला घलोक देवइय्या नंइहे।
लेना जी लेना सबोझन कहिथे
संग में रेंगइय्या कोनो नंइहे।।
देख के कहिथँव ये दूनियादारी
एक बात तो अब समझ आथे।
चलथे जी ओकर आगू पीछू मा
जेन हर पाँवपूट चेपटी पियाथे।।
मँय हर रहिगेंव सिधवा सादा
दाँव पेंच मोला आवय नहीं।
सुनेंव वो मनखे कभू नंइ जीते
जेन कभू पियाय खवावय नहीं।।
मुड़ी ह फिजगेहे पानी मा तब
सुरा ला का अब डरराना हे।
होही जइसन राम जी राखय
पाँव नंइ चिटको हटाना हे।।
कहिथे तोषन सुनगा भैय्या
डर के आघू मा ही जीत हे।
नहीं काहत हे बहिरी ले जेन
भीतरे भीतर ले तोर मीत हे।।
तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
डौंडी लोहारा बालोद छ.ग.
9575070689
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