काँटे
है सुरक्षित
महकता गुलाब
काँटों के मध्य...
कैसे बढ़ता
काँटोें भरी राह पे
अड़चन है...
जग वीरान
काँटों भरा जीवन
सुमन नहीं...
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...
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