मंगलवार, 27 मार्च 2018

काँटें

काँटे

है सुरक्षित
महकता गुलाब
काँटों के मध्य...

कैसे बढ़ता
काँटोें भरी राह पे
अड़चन है...

जग वीरान
काँटों भरा जीवन
सुमन नहीं...

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव

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