मिटे दरार--
बँधे एक्य सूत्र से
नवरात्रि में.
हुए दरार--
भाई भाई के मध्य
बढ़ती दूरी.
बँटता जग
दरारों के दरम्याँ
समेटो कोई---
कैसे खिलता
गुलाब सीमा पर
बाधा दरार---
रहें मिलके--
भर दें दरार को
प्रेम रेत से.
तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगाँव
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें