सोमवार, 8 जून 2020

उगा भास्कर

हाइकु 575 का वार्णिक काव्य है जिसमें कट मार्क का विशेष महत्व है।उससे दो बिम्ब की झलक मिलती है। कट मार्क से कारण और फल प्रदर्शित होता है।


उगा भास्कर-
सरोवर में तैरता 
हंस का जोड़ा।1।

पराग कण-
मंडराता भँवरा
पुष्प बाग मे।2।

अमा की रात-
टिमटिमाते जुग्नू
धरती पर।3।

नदी बहती-
पावस प्रदेश में
हिरण झूंड।4।

बरखा आई-
लहराता सागर
अम्बर तले।5।


तोषण चुरेन्द्र दिनकर

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...