गुरुवार, 6 अक्टूबर 2016

करमा


#लडका
करमा नचाहूं तोला ओ आना मादर के थाप मा
#लड़की
करमा नचादे मोला गा आना मादर के थाप मा

#लड़का
धान लुए हंसिया बही गजब उड़ावय कंशी ओ
सुध मा तोर होके दीवाना मन बजावय बंशी ओ
करमा नचाहूं तोला ओ आना मादर के थाप मा
#लड़की
करमा नचादे मोला गा आना मादर के थाप मा
#लड़की
आए सावन गरजे बादर रिमझिम परे फोहार गा
किजरौं मैहा जंगल झारी पारत हांक गोहार गा
करमा नचादे मोला गा आना मादर के थाप मा
#लड़का
करमा नचाहूं तोला ओ आना मादर के थाप मा
#लडका
सुघ्घर लागे मोला रानी हांसी तोर ठिठोली ओ
नांक के नथनी कान बाली मया के मारे गोली ओ
करमा नचाहूं तोला ओ आना मादर के थाप मा
#लड़की
करमा नचादे मोला गा आना मादर के थाप मा
#लड़की
धिक धिनिंधा मादर बाजे करमा के ताल गा
तोर मया म होगेंव बही हाल हे बेहाल गा
करमा नचाहूं मोला गा आना मादर के थाप मा
#लड़का
करमा नचाहूं तोला ओ आना मादर के थाप मा
#लड़का_लड़की
करमा नचाहूं तोला ओ आना मादर के थाप मा
करमा नचादे मोला गा आना मादर के थाप मा
गीत #आचार्य_तोषण धनगांव डौंडीलोहारा
बालोद छत्तीसगढ़ ९६१७५८९६६७

मन मलीनता धोए नहीं,पावडर रहे पोताय।

मन मलीनता धोए नहीं,पावडर रहे पोताय।
दुनिया के चकाचौंध मा, सबझन लगे मोहाय।
आज देखव जमाना ला,कोन डहर मा हे जात।
आतंकवाद नक्सलवाद मा, होवत हे रक्तपात।
दारू पियय दरूहा संगी,तिरिया लइका ह रोय।
हरताल सब दिन करय,फेर भट्ठी बंद कब होय।
नान्हे बड़े के मुंह ले ,निकलत गुंगवा के फूंक।
पाऊच खाए कचर कचर, जतर कतर दे थूक।
#आचार्य_तोषण

राखी ल...

राखी ल...
चिट्ठी पतरी के नंइहे जमाना
कइसे भेजंव भइय्या राखी ल
जारे परेवना तोर आसा हे
लहरावत जाबे दुनों पाखी ल

दाई ददा के दुलारा बेटा
भइय्या मोर तै हीरा असन
पेट गुजारा करेके सुध म
बसगे जाके अब दूसर वतन
बइठके दाई के कोरा म
कोन खही अब बासी ल
चिट्ठी पतरी के नंइहे जमाना
कइसे भेजंव भइय्या राखी ल
जारे परेवना तोर आसा हे
लहरावत जाबे दुनों पाखी ल
आजा लहुट सुन मोर भाई
ए भुइंया हर तोला बलावय
कइसे भुलागे दाई के सुरता
तोला रोज जे खेल खेलावय
तोर बिना इंहा कोन करही
खेती डोली के बियासी ल
चिट्ठी पतरी के नंइहे जमाना
कइसे भेजंव भइय्या राखी ल
जारे परेवना तोर आसा हे
लहरावत जाबे दुनों पाखी ल
दाई ददा के सेवा जतन म
मिलथे जनम जनम के पून
मोर कहिनी ल मान ले तैह
बने हकन के बात ल गुन
आके घर छोड़ादे "तोषण"
दाई ददा के धरे बैसाखी ल
चिट्ठी पतरी के नंइहे जमाना
कइसे भेजंव भइय्या राखी ल
जारे परेवना तोर आसा हे
लहरावत जाबे दुनों पाखी ल
-आचार्य तोषण
सुर लय ताल म गलती होय
होही तेकर बर छमा याचना

क्यों नहीं..

क्यों नहीं..
मेरी लिखी हुई वो दर्द की
बात कोई गुनता क्यों नही
निकले दिल से आह बनकर
ये अल्फाज सुनता क्यों नही

बहुत हो चुकी अब चांद को
जर्रो जमीं पर लाने की बात
जमीं को चांद पर ले जाने का
सपना कोई बुनता क्यों नही


हर किसी की चाहत है यहां
तख्ते ताज पर जाके बैठना
शिवाय मेहनत के बागबां पे
युंही गुल खिलता क्यों नहीं
-आचार्य तोषण

हैप्पी राखी

_झंउहा_झंउहा

बरसे सावन.....

बरसे सावन.....
लोक असर साप्ताहिक पत्रिका बालोद प्रकाशन
मा इही रचना ह बारह अगस्त दो हजार सोलह के छपे हे
 एखर बर संपादक श्री दरवेश आनंद जी अऊ फीचर
संपादक श्री पुष्कर सिंह राज जी ल सादर अभार अऊ धन्यवाद हे

जिनगी में कभू घमंड झन करबे "तोषण" माटी के बने हस माटी म मिलबे।
arhkepagakalagi.blogspot.com|आचार्य तोषण चुरेन्द्र द्वारा

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काबर रिसाए...

काबर रिसाए...
काबर रिसाए मैना मोर । तडपत हबे चोला मोर
पीरीत के बोली बोल ।
 मया के केवडिया खोल
मुसकइ चेहरा झूले झूल ।
मोर हिरदे फूले फूल
रेंगना देख चंदा लजाए । लाज मरे बेर मर जाए
हिरनी सही आंखी तोर ।
 लुगरा भावे सांखी तोर
बइहा बन किंजरों खोर ।
 सुधबुध घलो नंइहे थोर
झिन दिखाबे मोला आंट । मया के दुख पीरा बांट
सुरता ह आथे दिन रात ।
कतक काहंव मनके बात
बता मोला तैहर आज ।
काबर हस तैहर नराज
झनले अब तोषण के जान । झन रिसा अब बात ल मान
आचार्य तोषण

अच्छी नही लगती

हुनर मेरी किसी को अच्छी नही लगती
जवानी कलम की बच्ची नही लगती
आजमा कर देख लो जमाने वालों मुझे
उम्र कलम की कभी कच्ची नही लगती
पहुँचना चाहता हूँ हर नुक्कड़ ओ गली
पर लायक मेरे कोई बस्ती नहीं लगती
झूठ ही झूठ देखें हमनें इस मयखाने में
हर किसी की बात सच्ची नहीं लगती
दुध से जले है दही की चाहत मे 'तोषण'
हर दुध से बनी चीज लस्सी नही लगती
आचार्य तोषण ,धनगांव (डौंडीलोहारा)

रवानी में

गुंजाइश नहीं कोई शक की तेरी कहानी में
तू तो एक चिंगारी है आग लगा दे जवानी में
बदलकर रखदे जो अतीत सारे कायनात की
भरदे उमंग उन नदियों की उफनती रवानी में
आचार्य तोषण

कृष्ण_जन्माष्टमी


करिया मोहन ...
बंसुरी बजइय्या माखन चोरइय्या 
करिया मोहन नांग नथइय्या
मधुबन म तै किंजर किंजर के
सुरहिन गइय्या चरइय्या
बंसुरी बजइय्या माखन चोरइय्या
करिया मोहन नांग नथइय्या
बाला पन म लीला देखाए
पुतना रानी के बुता बनाए
बामन रूप बचन तै देके
पुतना ल मुक्ति देवइय्या
बंसुरी बजइय्या माखन चोरइय्या
करिया मोहन नांग नथइय्या
भुइंया के माटी गोंटी ल खाए
दसोदा ल मुंह म दुनिया देखाए
सरी दुनिया हे तोर मुट्ठी म
भव ले पार लगइय्या
बंसुरी बजइय्या माखन चोरइय्या
करिया मोहन नांग नथइय्या
बिंदाबन म रास रचाए
शंखर भोला ल नांच नचाए
संग म दूनों झुमर के नांचे
जग के नांच नंचइय्या
बंसुरी बजइय्या माखन चोरइय्या
करिया मोहन नांग नथइय्या
गोबरधन ल तैह उठाए
गिरधर कान्हा तैह कहाए
गोकुलवासी के मन ल भाए
सबके प्रान बचइय्या
बंसुरी बजइय्या माखन चोरइय्या
करिया मोहन नांग नथइय्या
धरम करम के पाठे पढाए
मइय्या दसोदा के मान बढाए
कुरुक्षेत्र के समरभूमि म
अर्जुन ल गीता सुनइय्या
बंसुरी बजइय्या माखन चोरइय्या
करिया मोहन नांग नथइय्या
हावे कहनी तोर अगम अपार
हम अढ़हा कहां पाबो तोर पार
हाथ लमाके मांथ नंवाके
"तोषण'' परत हावे पंइय्या
बंसुरी बजइय्या माखन चोरइय्या
करिया मोहन नांग नथइय्या

रचना :-आचार्य तोषण
धनगांव डौंडीलोहारा बालोद
छत्तीसगढ़ ९६१७५८६६७

बादर

छाए घनघोर करिया बादर
बरसे पानी सुख के आगर
मन हरियावय सावन मा
तरिया लागय जइसे सागर
आचार्य तोषण

एक परयास



कोन कोती भुलागे दांवना तैह जाके.
टूँहूं देखाए मोला मोंगरा तैह लाके.
आ संझौती जलाबो दीयना पीरियाके,
मोर बांधे मया डोरी छुरी तैह फांके.

सम्मान

आता नहीं मुझे कुछ फिर भी प्रयास करता हूं
परिणाम जो भी हो कर्म अनायास करता हूं।

त्रिदेव गणेशोत्सव समिति द्वारा सम्मान प्राप्त करते हुए

तीजा तिहार








तीजा तिहार
भइय्या हर मोर आवत होही
रोटी पीठा धरके लावत होही
करत निहोरा महतारी मोर
मन मनमा सोरियावत होही
आगे तीज तिहार ओ बहिनी
सब बहिनी के इही हे कहिनी
जाबो मानेबर दाई घर तीजा
सकलाबो बहिनी संन बहिनी
सुख दुख के गोठ गोठियाबो
दाई ददा के आसीस पाबो
लइका गोसंइय्या खुश रहे
शंखर भोला ल सबे मनाबो
तीजा के बिहान करबो फरहार
होही ए दिन लुगरा के बउछार
हंसी खुसी मनाबो भइया तीजा
एसो दाई घर के तीजा तिहार
नंइहे आस हमला लुगरा के बने रहय गा मया दुलार ।
आवत जावत रहिबो तोषण इही हबय सच्चा बेवहार।।
आचार्य तोषण
धनगांव डौंडीलोहारा
बालोद छत्तीसगढ़
 चित्र में ये शामिल हो सकता है: 1 व्यक्ति

मेरी जिंदगी बड़ी उदास है

मेरी जिंदगी बड़ी उदास है
हूँ दरिया फिर भी प्यास है

कसक है मुझे तु साथ नहीं
लगता है लेकिन तु पास है

देखता हर गुल को बगानो में
मेरे लिए बस गुलाब खास है

बावरा मन झुमे तेरे खातिर
जैसे कान्हा करता रास है

हल्की सी होती आहट कहीं
तेरे होने का होता एहसास है

लौट आओ तुम ओ साजन
बन बैठा " तोषण "अब दास है

भादो महिना तिहार के कोठी


नंदिया बइला पोरा के तिहार आवत हे दीदी भइय्या मोर
भादो महिना के का कहना तीजा गणेश के हावय सोर
नंदिया ल सम्हराके भइय्या
खारे खार दौड़ाबोन हो
अउव्वल जेन हर आही संगी
जुरमिल खुशी मनाबोन हो
बहिनी मनके पोरा जांता दरर दरर दरदराही गा
झुमर के नांचही संगी साथी सबके मन हरसाही गा
धरके पोरा के रोटी पीठा
बहिनी ल लाए बर जाबो
भादो महिना तीज के दिन
सब तीजा तिहार मनाबो
चउथ के आही गणपति बप्पा सूघर आसन पाही जी
मूसवा हावय जेखर सवारी लाडू के भोग लगाही जी
भादो महिना तिहार के कोठी
सबके मन ला भावत हे
बिधुन होके झुमे नर नारी
मिलके खुसी मनावत हे
आनी बानी के तिहार बार छत्तीसगढ़ के हे पहिचान
आवौ बढाबो जुरमिल के अपन सोनहा भुइंया के मान
आचार्य तोषण
धनगांव डौंडीलोहारा

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एक गांव

एक गांव जहाँ एक मुखिया रहता था जो सर्व गुण संपन्न था सभी उनका आदर सम्मान करते थे। हर जगह उनकी पूछ परख थी । लेकिन खुद मुखिया के घर मे हमेशा कलह परेशानियों का बाज़ार लगा हुआ था। दुनिया के लिए वह बहुत ही अच्छा इंसान साबित हुआ लेकिन अपने घर के लिए ढोल के भीतर पोल वाली कहावत को साबित करता । लोगों के समक्ष बड़ी बड़ी बात रखना लेकिन जब खुद के घर की बारी आती तो पांच कदम पीछे। मुखिया से सारा घर परेशान था। उनसे कोई भी खुश न था। और अंत मे वह मुखिया अपने पूरे परिवार के बिखरने का कारन बना गया । कोई भी उसके कार्य करने के तरीके से खुश नही थे क्यों कि वह मुखिया हर जगह अपनी ही मनमानी चलाता था । परिवार के सब सदस्य उनसे दुखी थे। लेकिन कर भी क्या सकते थे उसके खिलाफ जाने की किसी भी सदस्य में हिम्मत भी न थी । एक था जो मुखिया जी को झकझोर देता लेकिन घर के बाकी सदस्य उनकों रोक देते थे। अब क्या था गाड़ी जैसे तैसे चल रही है।
आपके विचार से क्या लगता है ?
गलती किसकी है ?

(यह वर्तमान मे संचालित संस्था की सत्य घटना है जोआज घटित हो रही है जिसे मैने भूत काल मे परिवर्तित करके लिखा है)

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...