गुरुवार, 6 अक्टूबर 2016

एक गांव

एक गांव जहाँ एक मुखिया रहता था जो सर्व गुण संपन्न था सभी उनका आदर सम्मान करते थे। हर जगह उनकी पूछ परख थी । लेकिन खुद मुखिया के घर मे हमेशा कलह परेशानियों का बाज़ार लगा हुआ था। दुनिया के लिए वह बहुत ही अच्छा इंसान साबित हुआ लेकिन अपने घर के लिए ढोल के भीतर पोल वाली कहावत को साबित करता । लोगों के समक्ष बड़ी बड़ी बात रखना लेकिन जब खुद के घर की बारी आती तो पांच कदम पीछे। मुखिया से सारा घर परेशान था। उनसे कोई भी खुश न था। और अंत मे वह मुखिया अपने पूरे परिवार के बिखरने का कारन बना गया । कोई भी उसके कार्य करने के तरीके से खुश नही थे क्यों कि वह मुखिया हर जगह अपनी ही मनमानी चलाता था । परिवार के सब सदस्य उनसे दुखी थे। लेकिन कर भी क्या सकते थे उसके खिलाफ जाने की किसी भी सदस्य में हिम्मत भी न थी । एक था जो मुखिया जी को झकझोर देता लेकिन घर के बाकी सदस्य उनकों रोक देते थे। अब क्या था गाड़ी जैसे तैसे चल रही है।
आपके विचार से क्या लगता है ?
गलती किसकी है ?

(यह वर्तमान मे संचालित संस्था की सत्य घटना है जोआज घटित हो रही है जिसे मैने भूत काल मे परिवर्तित करके लिखा है)

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