बुधवार, 25 अप्रैल 2018

साँई धाम


लोहारा के तीर मा,सुग्घर साँई ठाँव.
किरपा करथे हाथ ले,लेवव जुरमिल नाँव.

पानी ले दीया जरे,महिमा अपरम्पार.
जय हो साँई नाथ के,करलव जी जयकार.

सबके मालिक एक हे,सबझन ला समझाय.
सरधा सबुरी हाँथ में,गठरी लेहु बँधाय..

लइका जायसवाल के,साँई धाम बनाय.
मिलके सब परिवार हा,झूमके परब मनाय.

संगी तोषण आज जी,मन मन हे हरसाय.
मोर जनम अब धन्य हे,साँई दरसन पाय.

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद छ. ग.

औषधालय

*औषधालय*

कानन आज
बना औषधालय
मिलती दवा.

मिटे जीवन
बिन औषधालय
गाँव वीरान.

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद छ. ग.

सोमवार, 2 अप्रैल 2018

भट्ठी में

घुमेबर चलदेंव मेंह एकदिन गउ दारु भट्ठी म
का मोहनी डराय रथे बाटल अदधी अउ चपटी म

देखेव जाके जब अनर बनर
पियत बइठे सब जतर कतर
चांटत रहे नुन पीये के हे धुन
चाबवत चना ल कटर कटर

चलायके नंइहे सकति फेर चड़के जावै फटफट्टी म
का मोहनी डराय रथे बाटल अदधी अउ चपटी म

सुआरी लइका के मोह नंइहे
दानापानी के थोर संसो नंइहे
लगेहे लत इंहां पियकड़ु के
कोनों चाहे अब कहीं कइहे

पीयेबर पइसा निही त पइसा भिड़ाय चोरकट्टी म
का मोहनी डराय रथे बाटल अदधी अउ चपटी म

हर पियकड़ु जेब म अधार धरथे
पइसा नी रही जोगड़ कोनो करथे
संगवारी खोजथे पियकड़ु अपन
जीते जीयत पीही पीते पीयत मरथे

अलप समय पियइया ल जात देखेव मरघट्टी म
का मोहनी डराय रथे बाटल अदधी चपटी म

तोषण कुमार चुरेन्द्र

उड़ती फिरूँ

समीक्षार्थ

ताँका

उड़ती  फिरूँ
  उन्मुक्त  गगन  में
    बनके  पंछी
      चले  मन  पुरवाई
        करता  अगुवाई..

तोषण कुमार चुरेन्द्र

उड़ती फिरूँ

समीक्षार्थ

ताँका

उड़ती  फिरूँ
  उमुक्त  गगन  में
    बनके  पंछी
      चले  मन  पुरवाई
        करता  अगुवाई..

तोषण कुमार चुरेन्द्र

मोर आँखी के पुतरी

*समीक्षा बर आप सब के बीच प्रस्तुत*

*"मोर आँखी के पुतरी"*

*मोर आँखी के पुतरी कस चमकत रहिबे,*

*बनके फूल मन बगिया म महकत रहिबे!*

*झिन सिरावय मया तोर मोर बर संगी,*

*चिरइ कस हिरदे अंगना म चहकत रहिबे!*

*सावन के महिना बरसा बरोबर गुंइया,*

*बन ठन मया के बरखा बरसत रहिबे!*

*छावय झन दुख के बदरा तोर होंठ म,*

*फूल जस मंउहा खुल खुल हँसत रहिबे!*

*सरदी गरमी रीतु बरसात रहय चाहे,*

*सदा सुहागिन फूल जस सँवरत रहिबे!*

*भुल नइ पाहू तोला कभू मँय तोषण ह,*

*बइठ मया के रस्ता मोला अगोरत रहिबे.*

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव डौंडी लोहारा
  बालोद ( छ. ग.)

हनुमान जन्मोत्सव

दोहा

बुध नइहे गा थोरकी,नइहे कोनों ग्यान.
बल बुध मोला दे बिद्या,सुमरँव मँय हनुमान..

ग्यानी ध्यानी बीर तँय,करनी तोर कमाल.
किरपा बरसा आज तँय,हो सब जाय निहाल.

अंजनि माता के लला,अतुलित बल के धाम.
काज बना दे मोर तँय,संग तोर हे राम.

हनुमान जन्मोत्सव के
पावन अवसर म
सब झन ल बधई संग
गाड़ा भरके शुभकामना....

तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगाँव
३१/३/१८

सरस्वती वंदना

वीणा पाणि के चरणों मे
मेरा कोटि प्रणाम है
जिनसे मुखरित वेद चारों
गुंजित चारों धाम है....वीणापाणि.....

ब्रह्मा गावै विष्णु ध्यावै
देवता मिल सब राग सुनावै
वंदना से होती सुवासित
मेरे सुबह औ शाम है.......
वीणापाणि के चरणो में....

पद्मासन में तू है विराजित
श्वेताम्बर से है तू साजित
मेरी मइय्या तेरी कृपा से
होता मेरा नाम है......
वीणापाणि के चरणों में

तोषण कुमार चुरेन्द्र

मोर बिसाय गजरा

मोर  बिसाय  गजरा ल खोपा म लगाले.
आनी बानी के सोला सिंगार ल सजाले.
गजब दिन होगे रे बइरी देखे रेहेंव तोला,
एक घड़ी बइठ आँखी म अपन बसाले.

तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगाँव

मंगलवार, 27 मार्च 2018

काँटें

काँटे

है सुरक्षित
महकता गुलाब
काँटों के मध्य...

कैसे बढ़ता
काँटोें भरी राह पे
अड़चन है...

जग वीरान
काँटों भरा जीवन
सुमन नहीं...

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव

शनिवार, 24 मार्च 2018

दरार

मिटे दरार--
बँधे एक्य सूत्र से
नवरात्रि में.

हुए दरार--
भाई भाई के मध्य
बढ़ती दूरी.

बँटता जग
दरारों के दरम्याँ
समेटो कोई---

कैसे खिलता
गुलाब सीमा पर
बाधा दरार---

रहें मिलके--
भर दें दरार को
प्रेम रेत से.

तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगाँव

आश

करदो पूरी आश,सुनकर पुकार मा सती..
हो कलेश सब नाश,सब जग जीव निहाल हो...

तोषण कुमार चुरेन्द्र

तेरा लाल

माता मुझको थाम लो,हूँ मैं तेरा लाल..
मिल जाये आशीष जो,क्या मारेगा काल...

तोषण कुमार चुरेन्द्र

नवरात के दोहा

*नवरात के दोहा*

*लाली चुनरी साज के,माता अड़बड़ भाय!*
*दरसन करके भाग सब,अपन अपन सहुँराय!!*

*सुनले तँय गोहार वो,माँथ नवावँव आज!*
*भरे सभा मा आज तँय,मोरो रखदे लाज!!*

*लइका अबोध जानके,किरपा करदे आज!*
*बाधा मोरो टार के,पूरन करदे काज!!*

*दुरगा दाई के चरन,सबझन माँथ नँवाव!*
*जस पचरा सेवा भजन,मिल सब गाव बजाव!!*

*झूमव नाचव आज सब,परब हवय नवरात!*
*पंडा भजन सुनात हे,सेउक ढोल बजात!!*

*दोहा तोषण के सुनव,करलव सुंदर गान!*
*मिल देवव आशीष सब,पावँव सबके मान!!*

तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगाँव
arhkepagakalagi.blogspot.com

बुधवार, 21 मार्च 2018

मुक्तक

टुटे दिल सभी को दिखाना नहीं
अपनों से कभी भी छुपाना नही
कोई ठोकर मारे कोई दे सहारा
पर कभी किसी को रुलाना नहीं

हर तरफ उसके प्यार का एहसास करता हूँ मैं
खुशनुमा वो हरपल को मधुमास करता हूँ मैं
कब आ जाये न जाने वो लौटकर मेरी बाहों में
आने वाले हर उन पलों को खासम खास करता हूँ मैं

साथ जो न मिल पाये वो किनारे हैं हम
दूर रहकर भी इक दुजे के सहारे हैं हम
करते रहेंगे यूँ ही अब दीदार दूर से हम
चाँद को बस देखता जैसे सितारे है हम

मिलके आपसे  बिछड़ना हमें अच्छा नहीं लगता
यूँ छुपकर गुनाह करना हमें अच्छा नहीं लगता
आ जाएँगे हम किसी दिन दुनियाँ की निगाह में
सोच सोच कर ये पल हमें अच्छा नहीं लगता.

ये मोहब्बत मेरी मुझे बदनाम कर गई.
खुद  अपने नाम को गुमनाम कर गई.
चाहते थे हम तुम्हें हर पल खुश देखना,
नसीबा गम ए जुदाई सरेआम कर गई.

तोषण कुमार चुरेन्द्र

नवरात्रि

नवरात्रि विशेष

मातृ पूजन
नवजोत जलायें
नवरात्रि में....

जय माता की
जयकारा लगायें
शेरावाली की....

तोषण कुमार चुरेन्द्र

शनिवार, 3 मार्च 2018

आओ मनायें होली

*आओ मनायें होली*

इन्द्रधनुषी रंगों के संग मनायें आओ होली
भाईचारे का प्रेम भाव से मिलके लगाओ रोली

बरसाने में राधा के संग
होली खेले नंदलाल
रंग बिरंगी छटा बिखेरे
मिलके अबीर गुलाल

रंगने निकले आज नटवर को ललिता की टोली...
भाईचारे का प्रेम भाव से मिलके लगाओ रोली...

पीली सरसों की रंग लेकर
होती रहे रंगीली बौछार
स्नेह भरी पिचकारी से
छलकता रहे सिर्फ प्यार

सतरंगी रंगों से मिलकर बनते आज रंगोली...
भाईचारे का प्रेम भाव से मिलके लगाओ रोली...

राम लखन भरत शत्रुघन
उड़ावै रंग अबीर गुलाल
नल नील सुग्रीव जामवंत
लाल हनुमत करे कमाल

कृपा है उस ईश्वर की जो भरते सबकी झोली...
भाईचारे का प्रेम भाव से मिलके लगाओ रोली

मिटे भ्रष्टाचार देश की
मेरे जहान में शांति रहे
सूरज बने फैलाता जग में
हरपल अपनी कांति रहे

नहीं फटे कहीं गोला बारुद चले न अब कही गोली...
भाईचारे का प्रेम भाव से मिलके लगाओ रोली...

खुशनुमा हो जीवन सबका
रंगों भरा आसमान हो
लक्ष्य हो पूर्ण सभी का
सफलता का सोपान हो

मंगलमयी कामनाओं से भरी हो सबकी झोली...
भाईचारे का प्रेम भाव से मिलके लगाओ रोली...

तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगाँव डौंडी लोहारा
९८२६७००३१९,,९६१७५८९६६७

तीन रंग के रंग मा...

रंग दे आज बिधाता मोला तीन रंग के रंग मा
देशभक्ति रहय जीयत मरत ले अंग-अंग मा...

केसरिया के रंग मा रंग के
साहस सदा भरे रहय
बइरी मन ला मार गिरावँव
छाती मोर तने रहय

बोलँव भारत माता के जय भुजा डोलय तरंग मा
देशभक्ति रहय जीयत मरत ले अंग-अंग मा...

शांति के संदेस देवंव
सादा रंग मा रंगे रहँव
चलत रहँव सतमारग मा
हरिशचंद जस सते कहँव

झन झपावय कोनों मनखे भ्रष्टचार के सुरंग मा
देशभक्ति रहय जीयत मरत ले अंग-अंग मा....

भारत के सोनहा भुंइया
हरा-भरा खुशहाल रहय
छत्तीसगढ़ के पबरित माटी
धान के कटोरा कहय

सुख समृद्धि पावय सब नाचय गावय उमंग मा
देशभक्ति रहय जीयत मरत ले अंग-अंग मा....

ये तीन रंग के मान बर
कतको बीर बलिदानी हे
जनम जनम ले रही अमर
अइसन एखर कहानी हे

साहस सत समृद्धि खातिर जोस सेना के दबंग मा
देशभक्ति रहय जीयत मरत ले अंग-अंग मा....

तिरंगा हवय हमर संगी हो
सब्बो रंग ले बढ़िहा
मिलके तोषण के संग मा
रंग लव छत्तीसगढ़िहा

आवव नाचव गावव लगावव रंग ले रंग मा
देशभक्ति रहय जीयत मरत ले अंग-अंग मा....

कृति
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़
९८२६७००३१९,
९६१७५८९६६७

शुक्रवार, 23 फ़रवरी 2018

सेवा के मेवा

हाइकु
सुत्र ५/७/५

सेवा के मेवा
   मिलही  एकदिन
      धीरज  धर.....

मोर  करम
   हवय  बईमान
      देवय  धोखा

ददा  के  हाथ
   किरपा  बरसय
      सकेलो  सब...

पइसा  ऱुख
   पनपे  भष्टाचार
      मुड़  के  पीरा...

पानी  लावय
   बंगाला  के  चटनी
        बड़  सुहाय...

बिदा  बेटी  के
  ददा  बड़  रोवय
      दाई  सुसके

मोर  मोहना
   जाबे  कहाँ  बाँचके
       रँगहूँ  तोला...

सुग्घर गोठ
   छत्तीसगढ़िहा के
      लगथे मीठ...

रंग बे मोला
   नेवता देवत हों
      आजबे तैहा...

मिलके दुनों
   रचाबो रंग रास
      होरी तिहार...

अपन गोठ
    बढ़िहा जमत हे
        जोड़ी हमर...

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...