*नवरात के दोहा*
*लाली चुनरी साज के,माता अड़बड़ भाय!*
*दरसन करके भाग सब,अपन अपन सहुँराय!!*
*सुनले तँय गोहार वो,माँथ नवावँव आज!*
*भरे सभा मा आज तँय,मोरो रखदे लाज!!*
*लइका अबोध जानके,किरपा करदे आज!*
*बाधा मोरो टार के,पूरन करदे काज!!*
*दुरगा दाई के चरन,सबझन माँथ नँवाव!*
*जस पचरा सेवा भजन,मिल सब गाव बजाव!!*
*झूमव नाचव आज सब,परब हवय नवरात!*
*पंडा भजन सुनात हे,सेउक ढोल बजात!!*
*दोहा तोषण के सुनव,करलव सुंदर गान!*
*मिल देवव आशीष सब,पावँव सबके मान!!*
तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगाँव
arhkepagakalagi.blogspot.com
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