शनिवार, 24 मार्च 2018

नवरात के दोहा

*नवरात के दोहा*

*लाली चुनरी साज के,माता अड़बड़ भाय!*
*दरसन करके भाग सब,अपन अपन सहुँराय!!*

*सुनले तँय गोहार वो,माँथ नवावँव आज!*
*भरे सभा मा आज तँय,मोरो रखदे लाज!!*

*लइका अबोध जानके,किरपा करदे आज!*
*बाधा मोरो टार के,पूरन करदे काज!!*

*दुरगा दाई के चरन,सबझन माँथ नँवाव!*
*जस पचरा सेवा भजन,मिल सब गाव बजाव!!*

*झूमव नाचव आज सब,परब हवय नवरात!*
*पंडा भजन सुनात हे,सेउक ढोल बजात!!*

*दोहा तोषण के सुनव,करलव सुंदर गान!*
*मिल देवव आशीष सब,पावँव सबके मान!!*

तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगाँव
arhkepagakalagi.blogspot.com

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