सिंहनी
तेरा मेरा फेरा,करता मनवा प्रचंड डेरा जानो।
सारा जीवन निकला,करतब करता सब ही तुम मानो।।1।।
पलपल करता रहता,लीला प्रभु की अनंत शाखा फैली।
जपलो भजलो प्यारे,मत कर मन को दिनकर यूँ मैली।।2।।
ढूँढो मत दर मंदिर,मिलता सबको सनाथ जग सारा।
कोई फेरे माला,मन से है जो कोई भी हारा।।3।।
दिनकर बाँटे आभा,जगमग सारा जहान सुन लो भाई।
बाँटो भाईचारा,झूमे अवनी अंबर पुरवाई।।4।।
कृष्णा राधा जोड़ी,खेले मधुबन उमंग शंकर नाचे।
ताली बजती भारी,नित दिनकर लिखते पढ़ते साचे।।5।।
तोषण चुरेन्द्र दिनकर
डौंडी लोहारा बालोद
छत्तीसगढ़
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