हम तुम दोनों साथियाँ,एक बाग के फूल।
कभी नहीं होगी कहो, इक दूजे से भूल।।1
मिलकर हम तुम साथ हो,पथ हो चाहे शूल।
एक रहेंगे नेक हम,बनकर प्रेमी फूल।।2
हम तुम तुम हम एक हैं,जानें है संसार।
कभी रूक पाये नहीं, हम दोनों का प्यार।।3
बनकर हम तुम सारथी,रथ हाँके दिन रैन।
निहारती हो जग सदा, इक दूजे के नैन।।4
दिनकर बाँटे रोशनी, हम तुम पालें आभ।
भोर किरण देती हमें,लाख टका का लाभ।।
तोषण चुरेन्द्र दिनकर
डौंडी लोहारा बालोद
छत्तीसगढ़
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