बुधवार, 8 अप्रैल 2020

बासी चटनी खाले ठनके

त्वरित कविता

बाई जी कथे मोला जी 
का बतावँव तोला जी
आठ बजत ले सुते रहिथस
बारा बजत ले जागत रहिथस

रात दिन मोबाइल के ध्यान रथे
रहिथे कहीं सुरता जेन कोनों कथे
मोर बार ल मानस निही
आगू पाछु ल जानस निही

कथे मोरो तीर ध्यान लगाय कर 
मछरी कोतरी  भूंजी लाय कर 
तभे तो तोला खवाहू जी
संग संग महूँ खाहूँ जी

महूँ ह कहेंव डुमेश के दाई
जादा झन कर ना करलाई
करोना वायरस फइले हवय
सब झन देखले घइले हवय

बासी चटनी खाले जमके
रही तन हा सबके ठनके
दारभात ल खावव संगी
जय श्री राम गावव संगी।।

तोषण धनगंइहा

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