सत्य घटना २०१५-१६ की
एक दिन एक आचार्य की पत्नी अपने मायके से बस में आई ।स्टेशन से उतर कर घर आने को पैदल चल पड़ी कि अचानक एक बाईक वाला आके एक्सीडेंट कर देता है। कोई उसे कुछ ना कहे ऐसा सोच वह उसकी पत्नी को
हास्पिटल ले जाता है। इस बात का पता जब उस औरत के पति (आचार्य) को चलता है वह अपने प्राचार्य व दो अन्य आचार्य के साथ तुरंत हास्पिटल पहुंचता है । तो एक्सीडेंट करने वाला व्यक्ति उससे कहता है कि गलती मेरी है ।आप ईलाज करवाइये जो भी खर्चा आएगा हम वहन करने को तैयार है ।प्राचार्य व अन्य दो आचार्य को पता था कि वह एक्सीडेंट करने वाला सरस्वती शिशु मंदिर का विद्यार्थी रह चुका है इसलिए अपने आचार्यों के भरोसे को नहीं तोडेगा इस भरोसे वह आचार्य जिसकी पत्नी का एक्सीडेंट हुआ था उनहोंने एफ आई आर नही करवाया क्यों कि वह समझ गया था अगर ऐसा करेगा तो वह व्यक्ति आगे कक्षा की पढाई नहीं कर पाएगा और इसका भविष्य खराब हो जाएगा। ये बात उस आचार्य को समझ में आ गई।
अब इधर इलाज शुरू हुआ । खर्चे भी बहुत आई। जब सारा बिल उस व्यक्ति और उसके माता पिता के पास पहुँचा तो वहां का नजारा ही पलट गया ।जो बात भरोसे पर विश्वास पर कायम थी वह अविश्वास मे बदल गया ।भरोसा पूरी तरह से टूट गया ।जब उनका जवाब सुना कि हमने ऐसा कुछ नही कहा ।आपने एफ आई आर नहीं की आपकी गलती। वह आचार्य अपने को कोसता हुआ व़हां से चलल पड़ा कि मैने अपने विद्यालय में पढे हुए उस व्यक्ति पर विश्वास क्यों किया।
अब आप ही बताएं गलती किसकी???
-आचार्य तोषण
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