कातिक अमावस के रात दाई लछमी के पूजा करे के साथ साथ हम छत्तीसगढ़िहा मन देवारी ल सूरोती के परब के रूप म मनाथन।गोंड भाई मन स मिल के गौरा गौरी ल घलक मनाथन । नवा चंऊर के पिसान के फरा रोटी अऊ दीया जलाथन फेर आज हमन चकाचौंध के दुनिया म भुलाके अपन संस्कृति धरोहर अऊ पुरखा मन के गोठ बात ल बिसरत जात हन येहा हमर मन बर बड़ा दुख के बात आय । मैं तो ठेठ जंगलिहा धनगांव के रहवासी हंव ।हमर कोती नंवा पिसान के दीया बनाके अपन आरा पारा के देव धामी के जगा कोठार खलिहान आदि म दीपदान करके अंजोर करे के प्रयास करथन।। आप सबो संगी संगवारी मन ले बिनती हे माटी के दीया के संग संग नवा पिसान के दीया के दीपदान करव।
आप ल पुनः धनतेरस नरकचौदस लछमी पूजा गोवरधनपूजा अऊ भाईदूज के खालाखूझर बधई अउ शुभकामना
आचार्य तोषण
धनगांव डौंडीलोहारा
बालोद छत्तीसगढ़
धनगांव डौंडीलोहारा
बालोद छत्तीसगढ़

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