गुरुवार, 7 जुलाई 2016

सबले बड़े चोर...

सबले बड़े चोर...
एक घांव एक झन राजा के सभा लगे रिहिसे। राजा हूरहा एक ठन सवाल पूछ दिस-"सबले बड़े चोर कोन आए ? कोई ह धरम के चोर ल सबले बड़े चोर कहे ,त कोई ह स्त्री चोरइय्या ल ,कोई ह लईका चोरइय्या ल। सब झन अपन अपन हिसाब ले बतइस आखरी में एक झन सियनहा अउ अनभव करइय्या सियान ल पूछिस त बतइस कि एमन तो अईसने नान्हे चोर हरे, एमन ल तो परेम से अउ सजा देके सुधारे जा सकत हे, उंखर अपराध ह तो इसपस्ट होथे। कामचोर ह अइसे चोर ए जेकर अपराध ह इसपस्ट नइ होय, लेकिन एहा घुना कीरा कस समाज के बेवस्था अउ खुद वो मनखे ल पोंडा कर देथे । एखर सेती काम ले जी चोरइय्या ह सबले बड़े चोर हे।।
कई झन मन एखरो ले बड़े कमचोरहा हे । इंखर असूल रथे-
अजगर करे नी नौकरी, चिरई करै नही काम।
दासमलूका कहे गईस, सबके दाता राम।।
सअभार:जीओ तो ऐसे जीओ की "हाथ की सच्चाई" से छत्तीसगढ़ी रूपांरतन।
अनुवादक :-आचार्य तोषण

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