गुरुवार, 6 अक्टूबर 2016

बरसे सावन.....

बरसे सावन.....
लोक असर साप्ताहिक पत्रिका बालोद प्रकाशन
मा इही रचना ह बारह अगस्त दो हजार सोलह के छपे हे
 एखर बर संपादक श्री दरवेश आनंद जी अऊ फीचर
संपादक श्री पुष्कर सिंह राज जी ल सादर अभार अऊ धन्यवाद हे

जिनगी में कभू घमंड झन करबे "तोषण" माटी के बने हस माटी म मिलबे।
arhkepagakalagi.blogspot.com|आचार्य तोषण चुरेन्द्र द्वारा

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काबर रिसाए...

काबर रिसाए...
काबर रिसाए मैना मोर । तडपत हबे चोला मोर
पीरीत के बोली बोल ।
 मया के केवडिया खोल
मुसकइ चेहरा झूले झूल ।
मोर हिरदे फूले फूल
रेंगना देख चंदा लजाए । लाज मरे बेर मर जाए
हिरनी सही आंखी तोर ।
 लुगरा भावे सांखी तोर
बइहा बन किंजरों खोर ।
 सुधबुध घलो नंइहे थोर
झिन दिखाबे मोला आंट । मया के दुख पीरा बांट
सुरता ह आथे दिन रात ।
कतक काहंव मनके बात
बता मोला तैहर आज ।
काबर हस तैहर नराज
झनले अब तोषण के जान । झन रिसा अब बात ल मान
आचार्य तोषण

अच्छी नही लगती

हुनर मेरी किसी को अच्छी नही लगती
जवानी कलम की बच्ची नही लगती
आजमा कर देख लो जमाने वालों मुझे
उम्र कलम की कभी कच्ची नही लगती
पहुँचना चाहता हूँ हर नुक्कड़ ओ गली
पर लायक मेरे कोई बस्ती नहीं लगती
झूठ ही झूठ देखें हमनें इस मयखाने में
हर किसी की बात सच्ची नहीं लगती
दुध से जले है दही की चाहत मे 'तोषण'
हर दुध से बनी चीज लस्सी नही लगती
आचार्य तोषण ,धनगांव (डौंडीलोहारा)

रवानी में

गुंजाइश नहीं कोई शक की तेरी कहानी में
तू तो एक चिंगारी है आग लगा दे जवानी में
बदलकर रखदे जो अतीत सारे कायनात की
भरदे उमंग उन नदियों की उफनती रवानी में
आचार्य तोषण

कृष्ण_जन्माष्टमी


करिया मोहन ...
बंसुरी बजइय्या माखन चोरइय्या 
करिया मोहन नांग नथइय्या
मधुबन म तै किंजर किंजर के
सुरहिन गइय्या चरइय्या
बंसुरी बजइय्या माखन चोरइय्या
करिया मोहन नांग नथइय्या
बाला पन म लीला देखाए
पुतना रानी के बुता बनाए
बामन रूप बचन तै देके
पुतना ल मुक्ति देवइय्या
बंसुरी बजइय्या माखन चोरइय्या
करिया मोहन नांग नथइय्या
भुइंया के माटी गोंटी ल खाए
दसोदा ल मुंह म दुनिया देखाए
सरी दुनिया हे तोर मुट्ठी म
भव ले पार लगइय्या
बंसुरी बजइय्या माखन चोरइय्या
करिया मोहन नांग नथइय्या
बिंदाबन म रास रचाए
शंखर भोला ल नांच नचाए
संग म दूनों झुमर के नांचे
जग के नांच नंचइय्या
बंसुरी बजइय्या माखन चोरइय्या
करिया मोहन नांग नथइय्या
गोबरधन ल तैह उठाए
गिरधर कान्हा तैह कहाए
गोकुलवासी के मन ल भाए
सबके प्रान बचइय्या
बंसुरी बजइय्या माखन चोरइय्या
करिया मोहन नांग नथइय्या
धरम करम के पाठे पढाए
मइय्या दसोदा के मान बढाए
कुरुक्षेत्र के समरभूमि म
अर्जुन ल गीता सुनइय्या
बंसुरी बजइय्या माखन चोरइय्या
करिया मोहन नांग नथइय्या
हावे कहनी तोर अगम अपार
हम अढ़हा कहां पाबो तोर पार
हाथ लमाके मांथ नंवाके
"तोषण'' परत हावे पंइय्या
बंसुरी बजइय्या माखन चोरइय्या
करिया मोहन नांग नथइय्या

रचना :-आचार्य तोषण
धनगांव डौंडीलोहारा बालोद
छत्तीसगढ़ ९६१७५८६६७

बादर

छाए घनघोर करिया बादर
बरसे पानी सुख के आगर
मन हरियावय सावन मा
तरिया लागय जइसे सागर
आचार्य तोषण

एक परयास



कोन कोती भुलागे दांवना तैह जाके.
टूँहूं देखाए मोला मोंगरा तैह लाके.
आ संझौती जलाबो दीयना पीरियाके,
मोर बांधे मया डोरी छुरी तैह फांके.

सम्मान

आता नहीं मुझे कुछ फिर भी प्रयास करता हूं
परिणाम जो भी हो कर्म अनायास करता हूं।

त्रिदेव गणेशोत्सव समिति द्वारा सम्मान प्राप्त करते हुए

तीजा तिहार








तीजा तिहार
भइय्या हर मोर आवत होही
रोटी पीठा धरके लावत होही
करत निहोरा महतारी मोर
मन मनमा सोरियावत होही
आगे तीज तिहार ओ बहिनी
सब बहिनी के इही हे कहिनी
जाबो मानेबर दाई घर तीजा
सकलाबो बहिनी संन बहिनी
सुख दुख के गोठ गोठियाबो
दाई ददा के आसीस पाबो
लइका गोसंइय्या खुश रहे
शंखर भोला ल सबे मनाबो
तीजा के बिहान करबो फरहार
होही ए दिन लुगरा के बउछार
हंसी खुसी मनाबो भइया तीजा
एसो दाई घर के तीजा तिहार
नंइहे आस हमला लुगरा के बने रहय गा मया दुलार ।
आवत जावत रहिबो तोषण इही हबय सच्चा बेवहार।।
आचार्य तोषण
धनगांव डौंडीलोहारा
बालोद छत्तीसगढ़
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मेरी जिंदगी बड़ी उदास है

मेरी जिंदगी बड़ी उदास है
हूँ दरिया फिर भी प्यास है

कसक है मुझे तु साथ नहीं
लगता है लेकिन तु पास है

देखता हर गुल को बगानो में
मेरे लिए बस गुलाब खास है

बावरा मन झुमे तेरे खातिर
जैसे कान्हा करता रास है

हल्की सी होती आहट कहीं
तेरे होने का होता एहसास है

लौट आओ तुम ओ साजन
बन बैठा " तोषण "अब दास है

भादो महिना तिहार के कोठी


नंदिया बइला पोरा के तिहार आवत हे दीदी भइय्या मोर
भादो महिना के का कहना तीजा गणेश के हावय सोर
नंदिया ल सम्हराके भइय्या
खारे खार दौड़ाबोन हो
अउव्वल जेन हर आही संगी
जुरमिल खुशी मनाबोन हो
बहिनी मनके पोरा जांता दरर दरर दरदराही गा
झुमर के नांचही संगी साथी सबके मन हरसाही गा
धरके पोरा के रोटी पीठा
बहिनी ल लाए बर जाबो
भादो महिना तीज के दिन
सब तीजा तिहार मनाबो
चउथ के आही गणपति बप्पा सूघर आसन पाही जी
मूसवा हावय जेखर सवारी लाडू के भोग लगाही जी
भादो महिना तिहार के कोठी
सबके मन ला भावत हे
बिधुन होके झुमे नर नारी
मिलके खुसी मनावत हे
आनी बानी के तिहार बार छत्तीसगढ़ के हे पहिचान
आवौ बढाबो जुरमिल के अपन सोनहा भुइंया के मान
आचार्य तोषण
धनगांव डौंडीलोहारा

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एक गांव

एक गांव जहाँ एक मुखिया रहता था जो सर्व गुण संपन्न था सभी उनका आदर सम्मान करते थे। हर जगह उनकी पूछ परख थी । लेकिन खुद मुखिया के घर मे हमेशा कलह परेशानियों का बाज़ार लगा हुआ था। दुनिया के लिए वह बहुत ही अच्छा इंसान साबित हुआ लेकिन अपने घर के लिए ढोल के भीतर पोल वाली कहावत को साबित करता । लोगों के समक्ष बड़ी बड़ी बात रखना लेकिन जब खुद के घर की बारी आती तो पांच कदम पीछे। मुखिया से सारा घर परेशान था। उनसे कोई भी खुश न था। और अंत मे वह मुखिया अपने पूरे परिवार के बिखरने का कारन बना गया । कोई भी उसके कार्य करने के तरीके से खुश नही थे क्यों कि वह मुखिया हर जगह अपनी ही मनमानी चलाता था । परिवार के सब सदस्य उनसे दुखी थे। लेकिन कर भी क्या सकते थे उसके खिलाफ जाने की किसी भी सदस्य में हिम्मत भी न थी । एक था जो मुखिया जी को झकझोर देता लेकिन घर के बाकी सदस्य उनकों रोक देते थे। अब क्या था गाड़ी जैसे तैसे चल रही है।
आपके विचार से क्या लगता है ?
गलती किसकी है ?

(यह वर्तमान मे संचालित संस्था की सत्य घटना है जोआज घटित हो रही है जिसे मैने भूत काल मे परिवर्तित करके लिखा है)

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संपादक आदरणीय दरवेश आनंद जी अऊ फीचर संपादक
 आदरणीय पुष्कर सिंह 'राज' जी महोदय ल
 सादर अभार अउ धन्यवाद

●गणेश●


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गउरी के गणराज गणेश
सुमरंव तोला आज गणेश
करथस पूरा काज अशेष
सबझन करथन नाज गणेश
~~~~~~~~~~~~~~~~~
आचार्य तोषण

हे गणराज...


हे गणराज तोर आरती गाऊँ
आरती गाऊँ देवा तुमला मनाऊँ
हे गणराज....
सरधा के के थारी भगति के बांती
जगमग जगमग जले दिन राती
असरु सुमन प्रभु तुमला चढ़ाऊँ
हे गणराज....
दीन दुखियन के लाज बचइय्या
बाधा बिघन के दूर करइय्या
तन मन मनधन सब तोला लुटाऊँ
हे गणराज...
ज्ञान भक्ति बल बुद्धि देवइय्या
संतन के प्रभु मान रखइय्या
तोर चरनन में बलि बलि जाऊँ
हे गणराज....
गीत :-आचार्य तोषण
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़

ग्राम धनगांव गौशाला चौक स्कूल पारा


$खरखरा नहर बोहवय देखव संगी मोर गांव$
$लगर लगर नहावय मनखे एक जगा एक छांव$
$नहर तीर बिराजे शंखर मंदिर महाजन बबा के$
$मन भरके सब आशीष पाथे औघडिया के ठांव$
~~~~~~~~~~~~~~●~~~~~~~~~~~~~~
$इसकूल पारा गौठान बिराजे नंदी सोभा बढावत$
$पांव पलेगी मनावय कतको शरणे आवत जावत$
$बापूजी के बने इसतंभ पंचइत बढावत शान जिंहा$
$अटल जी चौंक सुघ्घर पीपरी तरी सोभा पावत$
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आचार्य तोषण ,धनगांव डौंडीलोहारा बालोद
छत्तीसगढ़ ४९१७७१,mo,९६१७५८९६६७

राम बनवास कथा जसगीत

राम बनवास कथा जसगीत

होगे अवधपुर सुन्ना हो मोर राजाराम बिना
मोर राजा राम बिना हो मोर सियाराम बिना
होगे अवधपुर...


कौशल्या के दुलरवा बेटा निकले जंगल झारी
दुख म रोवय राजमहल ह रोवत हे नर नारी
झरर झरर जब रोवे पुरवाई अवधपुर ह राम बिना
होगे अवधपुर...
राजा दशरथ के बात ल माने जंगल रस्दा बनाए
दाई केकई के बचन खातिर भरत ल राजा बनाए
राजा रोवय नइ जी पाहूं मोर ललनवा राम बिना
होगे अवधपुर...
भाई लखन संग राम जानकी रथम बइठ के जाए
अंसुवन धार बोहावत सुमंत घोड़ा ल हांक लगाए
रथ फंदाए घोड़ा कहिथे नइ रही पाहूँ राम बिना
होगे अवधपुर...
चलो लहुटबो कहिके सुमन राम करा गोहराए
बात बचन हे हावे कहिके राम ह लगे समझाए
सुमंत सोचे कइसे लहुटव राज दुलारा राम बिना
होगे अवधपुर...


रोवत रोवत सुमंत लहुटे मन मन सोचन लागे
काला बताहूं जाके राजा ल आंसू पोछन लागे
राजा पूछही आगेस सुमंत खाली तैहर राम बिना
होगे अवधपुर...


राम जानकी भाई लखन ह गंगा के तीर म आए
पार नहकादे हमला केंवट राम ह लगे गोहराए
नइ नहकावंव रामा तोला पांव तोर मै धोए बिना
होगे अवधपुर....


चरन पखारे भइय्या केंवट पुरखा ल अपन तारे
ढोंगा बइठारे राम लखन स महिमा ल पार उतारे
कहां पाबो सुख जिनगी म इहां के सुखधाम बिना
होगे अवधपुर...


रचनाकार :-आचार्य तोषण
धनगांव डौंडीलोहारा
बालोद छत्तीसगढ़

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...