राम बनवास कथा जसगीत
होगे अवधपुर सुन्ना हो मोर राजाराम बिना
मोर राजा राम बिना हो मोर सियाराम बिना
होगे अवधपुर...
कौशल्या के दुलरवा बेटा निकले जंगल झारी
दुख म रोवय राजमहल ह रोवत हे नर नारी
झरर झरर जब रोवे पुरवाई अवधपुर ह राम बिना
होगे अवधपुर...
राजा दशरथ के बात ल माने जंगल रस्दा बनाए
दाई केकई के बचन खातिर भरत ल राजा बनाए
राजा रोवय नइ जी पाहूं मोर ललनवा राम बिना
होगे अवधपुर...
भाई लखन संग राम जानकी रथम बइठ के जाए
अंसुवन धार बोहावत सुमंत घोड़ा ल हांक लगाए
रथ फंदाए घोड़ा कहिथे नइ रही पाहूँ राम बिना
होगे अवधपुर...
चलो लहुटबो कहिके सुमन राम करा गोहराए
बात बचन हे हावे कहिके राम ह लगे समझाए
सुमंत सोचे कइसे लहुटव राज दुलारा राम बिना
होगे अवधपुर...
रोवत रोवत सुमंत लहुटे मन मन सोचन लागे
काला बताहूं जाके राजा ल आंसू पोछन लागे
राजा पूछही आगेस सुमंत खाली तैहर राम बिना
होगे अवधपुर...
राम जानकी भाई लखन ह गंगा के तीर म आए
पार नहकादे हमला केंवट राम ह लगे गोहराए
नइ नहकावंव रामा तोला पांव तोर मै धोए बिना
होगे अवधपुर....
चरन पखारे भइय्या केंवट पुरखा ल अपन तारे
ढोंगा बइठारे राम लखन स महिमा ल पार उतारे
कहां पाबो सुख जिनगी म इहां के सुखधाम बिना
होगे अवधपुर...
रचनाकार :-आचार्य तोषण
धनगांव डौंडीलोहारा
बालोद छत्तीसगढ़
होगे अवधपुर सुन्ना हो मोर राजाराम बिना
मोर राजा राम बिना हो मोर सियाराम बिना
होगे अवधपुर...
कौशल्या के दुलरवा बेटा निकले जंगल झारी
दुख म रोवय राजमहल ह रोवत हे नर नारी
झरर झरर जब रोवे पुरवाई अवधपुर ह राम बिना
होगे अवधपुर...
राजा दशरथ के बात ल माने जंगल रस्दा बनाए
दाई केकई के बचन खातिर भरत ल राजा बनाए
राजा रोवय नइ जी पाहूं मोर ललनवा राम बिना
होगे अवधपुर...
भाई लखन संग राम जानकी रथम बइठ के जाए
अंसुवन धार बोहावत सुमंत घोड़ा ल हांक लगाए
रथ फंदाए घोड़ा कहिथे नइ रही पाहूँ राम बिना
होगे अवधपुर...
चलो लहुटबो कहिके सुमन राम करा गोहराए
बात बचन हे हावे कहिके राम ह लगे समझाए
सुमंत सोचे कइसे लहुटव राज दुलारा राम बिना
होगे अवधपुर...
रोवत रोवत सुमंत लहुटे मन मन सोचन लागे
काला बताहूं जाके राजा ल आंसू पोछन लागे
राजा पूछही आगेस सुमंत खाली तैहर राम बिना
होगे अवधपुर...
राम जानकी भाई लखन ह गंगा के तीर म आए
पार नहकादे हमला केंवट राम ह लगे गोहराए
नइ नहकावंव रामा तोला पांव तोर मै धोए बिना
होगे अवधपुर....
चरन पखारे भइय्या केंवट पुरखा ल अपन तारे
ढोंगा बइठारे राम लखन स महिमा ल पार उतारे
कहां पाबो सुख जिनगी म इहां के सुखधाम बिना
होगे अवधपुर...
रचनाकार :-आचार्य तोषण
धनगांव डौंडीलोहारा
बालोद छत्तीसगढ़
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