जब तक जलता रहूँगा जग में, ज्योति मिलेगी मुझसे ही।
होता जीवन सब प्रकाशित और अंधेरा मुझसे ही।
साथ मिले जो सबका मुझको,मैं भी साथ निभाऊँगा।
बनकर दीपक बाती संग मैं,तम को भी जीत जाऊँगा।
बन जाए अनमोल ये जीवन,हो जाये जग नाम अमर,
दीपदान कर अपने वतन पे,कर्ज चुका दे इस मिट्टी की।
बनकर ऊर्जा तेरे भाल पर,मिट्टी से तिलक लगाऊँगा।
बनकर दीपक बाती संग मैं,तम को भी जीत जाऊँगा।
मेरे बिन हर आँगन सूना,रौशन हर द्वारे मिलता।
मेरी महत्ता मान लो सब,अपना वजूद जान लो सब,
मुझसे ही होता अरूणोदय,और मुझसे है पुष्प खिलता।
मुझको सब स्वीकार करलो,नित नया सवेरा लाऊँगा।
बनकर दीपक बाती संग मैं,तम को भी जीत जाऊँगा।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा
डौंडी लोहारा
९६१७५८९६६७














