गुरुवार, 10 दिसंबर 2020

सावन के महीना मा

सादर समीक्षार्थ

सावन के महीना मा...

सावन के महीना मा, 
मन मोर मँजूर कस नाचय।
सनन-सनन चलय पुरवइय्या, 
गीत मया के गावय। 

होत बिहनिया सुरूज नरायण,
नवा अंजोर बगराथे।
दंडाशरन पाँव पँइय्या परके, 
मिलजुल सब परघाथे।
संगी जँहुरिया सुआ करमा, 
पंथी ददरिया सुनावय।.....

डोंगरी पहाड़ी चिरई चिरगुन,
देख मोला मुसकाथे।
कारी बदरा गरजे घन-घन, 
भुँइया के तन हरियाथे।
बरसय पानी झूमे रूख राई, 
नदिया नरवा इतरावय।....

पिंयर-पिंयर परसा फूलवा, 
संग फगुआ के राग हे।
सात सुर के धुनी छेड़य, 
सतरंगी संगी फाग हे। 
रहिबो एक डोरी बंधाके, 
तोषण अतरी गोहरावय।...

©opy®ight
तोषण कुमार चुरेन्द्र 'दिनकर'
सरपंच/साहित्यकार
धनगाँव, डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़

गुरुवार, 19 नवंबर 2020

हाय रे कोरोना चेकप


हाय रे कोरोना चेकप

आए रेहेन लोहारा संगी,सर्दी चेक कराय।
खँस्सी के चक्कर मा,बालोद रद्दा नपाय।

भरे मातर तिहार मा,आगेन कोविड सेंटर।
लागय अइसन का पड़ीस,हमला कोरोना हेंटर।

साग भात हा बने मिले,रोटी भाजी अचार।
साफ सफाई मा ढंग निही,सुख सुविधा बेकार।

भरे लिफाफा दिस थेमा,डाक्टर देखे नंइ भाय।
छत्तीसगढ़ सरकार के,कइसन बेवस्था आय।

चेक वेक करे निही ,परछी माढ़े हे मशीन।
आय जाय न हमला कहीं,चपकन काला कतीन।

लाके खोली म धान देहे,यहू का के हे काम।
मरे मरइय्या जान दे,अइसने चलही काम।

आनी बानी गोठ करथे,हमर छत्तीसगढ़ सरकार।
बिन नाहक जियत मरत हे,बने जनता लाचार।

गोठ करबे त गोठ हे,कतिक ला अब गोठियाँव।
सबे ला झिन कोरोना निकालव,अतरी मैं गोहराँव।

दू गज के दूरी अउ,मास्क हावय जरूरी कहिथे।
सुख-दुख घमनी-छँइहा,गरीब किसनहा सहिथे


तोषण चुरेन्द्र दिनकर
सरपंच(साहित्यकार)
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़

मंगलवार, 17 नवंबर 2020

हाय रे कोरोना चेकप

हाय रे कोरोना चेकप

आए रेहेन लोहारा संगी,
सर्दी चेक कराय।
खँस्सी के चक्कर मा,
बालोद रद्दा नपाय।

भरे मातर तिहार मा,
आगेन कोविड सेंटर।
लागय अइसन का पड़ीस,
हमला कोरोना हेंटर।

साग भात हा बने मिले,
रोटी भाजी अचार।
साफ सफाई मा ढंग निही,
सुख सुविधा बेकार।

भरे लिफाफा दिस थेमा,
डाक्टर देखे नंइ भाय।
छत्तीसगढ़ सरकार के,
कइसन बेवस्था आय।

चेक वेक करे निही ,
परछी माढ़े हे मशीन।
आय जाय न हमला कहीं,
चपकन काला कतीन।

लाके खोली म धान देहे,
यहू का के हे काम।
मरे मरइय्या जान दे,
अइसने चलही काम।

आनी बानी के गोठ करथे,
हमर छत्तीसगढ़ सरकार।
बिन नाहक जियत मरत हे,
बने जनता लाचार।

गोठ करबे त गोठ हे,
कतिक ला अब गोठियावँव।
सबे ला झिन कोरोना निकालव,
अतरी मैं गोहरावँव।


जय श्री राम
तोषण चुरेन्द्र दिनकर
सरपंच(साहित्यकार)
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़

सोमवार, 16 नवंबर 2020

हाय रे कोरोना काल(तोषण चुरेन्द्र दिनकर)

हाय रे कोरोना काल तै कइसन दिन देखाय
छोटे बड़े ला जाने नही अलकर नाच नचाय
हाय रे कोरोना काल......

आय कहाँ ले तैहर बइरी,दुनिया होगे हलाकान
सुतत जागत तोरेच चर्चा,करथे लइका सियान
तीर के मनखे दूरिहा भागे,मुँह मा मास्क लगाय
हाय रे कोरोना काल....

सर्दी खाँसी ह बनगे कोरोना,मन मा डर हे समागे
अस्पताल मा कोई नंइ जावै,कइसन दिन हा आगे
फिरत हावय मनखे देखव,सर्दी खाँसी लुकाय
हाय रे कोरोना काल...

विनती हावय सरकार ले,जल्दी दवा बनादे
हटे कोरोना सगरो जगत ले,नवा अंजोर बगरादे
हाँसय खेलय धरती डोली,रूख रई खुशी मनाय
हाय रे कोरोना काल....


रचनाकार
तोषण चुरेन्द्र दिनकर
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़

शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2020

शरद की अमृत धार

शरद पूर्णिमा की हार्दिक बधाई व शुभकामनाओं के एक रचना....

*शरद की अमृत धार*

चाँदनी रात में आज चाँद खिलखिलाया है।
लगता है जैसे अंबर धरती से मिलने आया है।

शरद की रातें जुगनू की तरह चाँदनी चमकती है।
बूँदे  ओस की धरा पर फैली कोहिनूर दमकती है।
देख - देख नजारा गगन से दिनकर भी शर्माया है।
लगता है जैसे अंबर धरती से मिलने आया है।1।

शरद की सर्द  रातें शीतलता बरसाती मन भीतर।
बगिया मुस्कुराती फूलों की खुश्बू बिखराती ईतर।
नवरसों में मदमाता भँवरा चहूँ दिक में मंडराया है।
लगता है जैसे अंबर धरती से मिलने आया है।2।

मधुबन बहकने लगी आज श्याम दर्श जो होना है।
प्रेम बहार सोलह श्रृंगार लिये एक दूजे में खोना है।
राधेकृष्ण की रासलीला स्वयं शिव देखने आया है।
लगता है जैसे अंबर धरती से मिलने आया है।3।

सप्त सुरों का राग लिए सतरंगी फाग महीना है।
इंद्रधनुषी रंगों की जैसी दुनिया और कहीं ना है।
शरद की अमृत धार से "दिनकर" आज नहाया है।
लगता है जैसे अंबर धरती से मिलने आया है।4।

©®
तोषण चुरेन्द्र दिनकर
धनगांव, डौ.लोहारा
बालोद,छत्तीसगढ़
30/10/20

रविवार, 18 अक्टूबर 2020

दाई के नवरात

दोहा गीत
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लाज सभा मा राखले,राहँव सबके मीत।
तोर दया ले आज मैं,गावत हावँव गीत।।
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आगे दिन नवरात के,रिगबिग चमके जोत।
हाँसत घर मा जात हे,आथे जेहर रोत।।
रखबे मुड़ मा हाथ तै,दया मया पीरीत।
तोर दया ले आज मैं,गावत हावँव गीत।।
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करे भगत गोहार सुन,बाढ़त हावय पाप।
छलकत गघरी देख तै,आजा लेबर नाप।।
पीरा हरले भगत के,सत के होवय जीत।
तोर दया ले आज मैं,गावत हावँव गीत।
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दुर्गा दाई रूप नौ,सबके मनला भाय।
जय माता की संग मा,जय जयकार लगाय।।
तोषण दिनकर हे भजे,साँझ बिहान सुखीत।
तोर दया ले आज मैं,गावत हावँव गीत।।
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तोषण चुरेन्द्र दिनकर
धनगांव, डौंडी लोहारा
बालोद छ.ग.
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रविवार, 13 सितंबर 2020

हिन्दी

विश्व हिन्दी दिवस की बधाई

हिन्दी अपनी शान है,भाषा ये अनमोल।
लिखते-पढ़ते हम सभी,रोज बोलते बोल।
रोज बोलते,बोल समझकर, अपनी बातें।
दुनिया भर में,हिन्दी भाषा,जाने जाते।
चमके जगमग,माथ सजे है,बनकर बिन्दी।
बढ़े बढ़ाये,पढ़े पढ़ाये,मिलकर हिन्दी।


मिलकर अक्षर से जुड़े,छंद बंध का मेल।
नवरस जिनसे नित मिले,चले हिन्द की रेल।
चले हिन्द की,रेल सवारी,अपने द्वारे।
वैदिक नैतिक, ज्ञान समाया,मानें सारे।
हिन्दी कहिए,हिन्दी पढ़िए,लिखिए  खिलकर।
मान बढ़ाएँ,ज्ञान कराएँ,हमसब मिलकर।

तोषण चुरेन्द्र दिनकर

मंगलवार, 21 जुलाई 2020

गीत


रिमझिम सावन देख , गीत है गाती पुरवा।
मोर पंख ले साथ,सजे है मानों दुरवा।
बरसे मेघ अथाह,दामिनी मद मे डोले।
दिनकर देखे मौन,हृदय खाये हिचकोले।

तोषण चुरेन्द्र "दिनकर"

गुरुवार, 2 जुलाई 2020

गुरु

गुरू पूर्णिमा विशेष गीत

गुरूदेव तुम्हारे चरणों में,
बसे हैं चारो धाम।
नमन मेरा स्वीकार करो,
कोटि तुम्हें प्रणाम।


मात पिता है प्रथम गुरूजी,
चलना हमें सिखाया।
सर्दी गर्मी और बरखा में,
छत्र की छाँव बिठाया।
कभी न पूरा ऋण ये होगा,
सुबह से लेकर शाम।
नमन मेरा स्वीकार करो,
कोटि तुम्हें प्रणाम।


शिक्षा दीक्षा दान करे हैं,
सत्य मार्ग दिखलाया।
पाप पुण्य भेद सारे,
गुरूवर ने है बताया।
धर्म कर्म और नीति नियम,
भरे हैं आठो याम।
नमन मेरा स्वीकार करो,
कोटि तुम्हें प्रणाम।


हमको देने नित रोशनी, 
बनकर दीपक जल रहे
कितनी भी आए बाधाएँ, 
ढाल सम है डटे रहे
चरणों में है तेरे झुके, 
राम कृष्ण सुखधाम
नमन मेरा स्वीकार करो,
कोटि तुम्हें प्रणाम।


आशीष सदा बनायें रखना, 
दिनकर की अरदास।
बनकर मेरी प्रेरणा, 
रहना सदा मेरे पास।
कारज कोई भी हो पहले,
जपूँ मैं तेरा नाम।
नमन मेरा स्वीकार करो,
कोटि तुम्हें प्रणाम।

रचनाकार:-
तोषण चुरेन्द्र दिनकर
डौंडी लोहारा बालोद
छत्तीसगढ़

बुधवार, 24 जून 2020

पावस

कलम की सुगंध छंदशाला
विषय:-चित्राभिव्यक्ति
विधा:- कुण्डलियाँ
दिनाँक :-24/06/2020
दिन :-बुधवार

1.
पावस पर्वत में गिरे,मुदित हुआ संसार।
लगती धरणी श्यामला,छाई खुशी अपार।।
छाई खुशी अपार,मगन हो झूमे सारे।
हरा भरा परिवार, वृक्ष भी वारे न्यारे।
दिनकर बैठा मौन,देखकर गहन अमावस।
सकल विश्व में धूम,लौट आई है पावस।

2.
आई है पावस लौट कर,फिर धरती के पास।
हरने धरती की व्यथा,करने जीव उजास।।
करने जीव उजास,गीत है सावन गाते।
भरा भरा है ताल,राग जो झिंगु सुनाते।
भड़क उठी है मेघ ,बहे है नित पुरवाई।
दिनकर देखे मौन,झूम के बरखा आई।

तोषण चुरेन्द्र दिनकर
डौंडी लोहारा बालोद
छत्तीसगढ़

सोमवार, 22 जून 2020

जय जवान (तोषण चुरेन्द्र दिनकर)


दिनाँक:-22/06/2020
दिन:-सोमवार
विधा :-दोहा
विषय :-जय जवान

सर्द गर्म बरसात हो,चलते सीना तान।
करे निरंतर चौकसी,मेरे वीर जवान।।1।।

बनकर जो फौलाद ये,लड़ते हैं पुरजोर।
खड़े रहे हिमशिखर पर,हिम आलय की छोर।।2।।

भारत माँ के लाल हैं,करते सिंह दहाड़।
शत्रु पसीनेंं पोछते,खाते लाख पछाड़।।3।।

खड़ा रहे दिन रात जो,रखने भारत शान।
हँसते हँसते ये सभी,त्यज देते है जान।।4।।

माता ऐसी धन्य है,दिये लाल बलिदान।
भारत मेरा देश ये,है जवान की खान।।5।।

जय जवान कहते चलें,रक्षित जिनसे देश।
शिक्षक और किसान भी,थामे है परिवेश।।6।।


सुन लो हे सरकार ये,सुखी रहे परिवार।
दिनकर भी अब साथ है,माने जग संसार।।7।।

तोषण चुरेन्द्र दिनकर
डौंडी लोहारा बालोद
छत्तीसगढ़

जिद तो अपनी भी थी...

मुक्त गजल 

जिद तो अपनी भी थी इस जमाने मे।
गुजर  जाए  जिंन्दगी तुझे भुलाने में ।

ढूँढती रही नजर मंजर-ए-तन्हाई पे,
गुम हो गई कहां,कौन से कैदखाने में ।

रूखसत हो गई गुलिस्ताँ-ए-इश्क  से,
चुभाना पड़ा हाथ बागबाँ सजाने में।

अर्ज है न गुजरो राह कभी इश़्क के,
आएगा "दिनकर" जहाँ के निशाने में।

तोषण कुमार चुरेन्द्र दिनकर
डौंडी लोहारा बालोद छ.ग.

मंगलवार, 9 जून 2020

राम नाम हे सार


राम नाम हे सार रे,जपले तै हरि नाम।
जाती बेरा थोरकिन,करले बढ़िहा काम।।
करले बढ़िहा काम तै,होवय जग मा शोर।
दया मया ला बाँट ले, बात मान ले  मोर।।
बात मान ले मोर सुन,राम भजन मा झूम।
तोर मोर के फेर मा,ऐती ओत न घूम।।

तोषण चुरेन्द्र दिनकर

करम के नाँगर


रोला

बने बने तँय साध,करम के नाँगर धरले।
बोंले बीजा पोठ,धरम के कोठी भरले।
रखले मीठ जुबान,बात ते करले गुरतुर।
शक्कर मिशरी घोर,कभू नइ होवय चुरपुर।

तोषण चुरेन्द्र दिनकर

तेरा मेरा

सिंहनी

तेरा मेरा फेरा,करता मनवा प्रचंड डेरा जानो।
सारा जीवन निकला,करतब करता सब ही तुम मानो।।1।।

पलपल करता रहता,लीला प्रभु की अनंत शाखा फैली।
जपलो भजलो प्यारे,मत कर मन को दिनकर यूँ मैली।।2।।

ढूँढो मत दर मंदिर,मिलता सबको सनाथ जग सारा।
कोई फेरे माला,मन से है जो कोई भी हारा।।3।।
 
दिनकर बाँटे आभा,जगमग सारा जहान सुन लो भाई।
बाँटो भाईचारा,झूमे अवनी अंबर पुरवाई।।4।।

कृष्णा राधा जोड़ी,खेले मधुबन उमंग शंकर नाचे।
ताली बजती भारी,नित दिनकर लिखते पढ़ते साचे।।5।।

तोषण चुरेन्द्र दिनकर
डौंडी लोहारा बालोद
छत्तीसगढ़

सोमवार, 8 जून 2020

उगा भास्कर

हाइकु 575 का वार्णिक काव्य है जिसमें कट मार्क का विशेष महत्व है।उससे दो बिम्ब की झलक मिलती है। कट मार्क से कारण और फल प्रदर्शित होता है।


उगा भास्कर-
सरोवर में तैरता 
हंस का जोड़ा।1।

पराग कण-
मंडराता भँवरा
पुष्प बाग मे।2।

अमा की रात-
टिमटिमाते जुग्नू
धरती पर।3।

नदी बहती-
पावस प्रदेश में
हिरण झूंड।4।

बरखा आई-
लहराता सागर
अम्बर तले।5।


तोषण चुरेन्द्र दिनकर

हम तुम

हम तुम दोनों साथियाँ,एक बाग के फूल।
कभी नहीं होगी कहो, इक दूजे से भूल।।1

मिलकर हम तुम साथ हो,पथ हो चाहे शूल।
एक रहेंगे नेक हम,बनकर प्रेमी फूल।।2

हम तुम तुम हम एक हैं,जानें है संसार।
कभी रूक पाये नहीं, हम दोनों का प्यार।।3

बनकर हम तुम सारथी,रथ हाँके दिन रैन।
निहारती हो जग सदा, इक दूजे के नैन।।4


दिनकर बाँटे रोशनी, हम तुम पालें आभ।
भोर किरण देती हमें,लाख टका का लाभ।।

तोषण चुरेन्द्र दिनकर
डौंडी लोहारा बालोद
छत्तीसगढ़

रविवार, 7 जून 2020

बीज (तोषण चुरेन्द्र "दिनकर")


विधा :-घनाक्षरी
दिनाँक :-7/6/20
दिन :-रविवार
विषय :-बीज
---------------------------------------
..............भारती किसान प्यारे,
..........धरती के हैं दुलारे
....खेतों में ये बीज बोयें,
हलबा महान है।।1।।

............बरसे प्रेम प्रकृति की,
........बीज हुआ अंकुरित,
....लेकर जनम नया,
भरे परवान है।।2।।

............नव रंग जब चढ़ा,
.........सीना ताने वृक्ष खड़ा,
....राहगीर बैठ छाँव,
मिटाते थकान है।।3।।

...........पक कर बीज बनो,
........परहित काज करो,
....नाज करे सारा जहां,
करे गुणगान है।।4।।
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तोषण चुरेन्द्र 'दिनकर'
डौंडी लोहारा बालोद

रविवार, 31 मई 2020

दिनकर का प्यार

तुझसे मिलने को दिल आज भी बेकरार है।
बरसो से था जिसका आज भी इंतजार है।

मुझसे रूठ गयी नाराजगी किस बात की,
समझ न पाया आखिर ये कैसा टकरार है।

रखा था मैने तुम्हें सर आँखों पे बिठाकर,
जानूँ न मेरी कौन सी बातों से इनकार है।

महकती रहेगी हमेशा गुल बनकर तेरी यादें,
तेरी हर एक एहसास से जिंदगी गुलजार है।

भूलादे तुम्हें रूह से अपने कभी मानना नही,
लगता तुने जाना नहीं ये दिनकर का प्यार है।

तोषण कुमार चुरेन्द्र "दिनकर"
धनगांव, डौंडी लोहारा, बालोद
छत्तीसगढ़,9575070689

शनिवार, 9 मई 2020

लाकडाऊन

*आज दिनांक 9/5/20 व 10/5/20 के लोकडाउन करने में सरकार के दोहरे मत को देखते हुए एक छोटी सी रचना*

*कुण्डलिनी*

देख लाकडाऊन असर,रोजगार भरमार।
कृषक जगत के काम को,बंद करे सरकार।
बंद करे सरकार,काम की कैसा माया।
आधे मरते भूख,आध को काम दिलाया।


*कुण्डलियाँ*

कहते सबसे गाँव में,मुखिया अपनी बात।
धरे कभी ना कान में,बड़ी अजब सौगात।
बड़ी अजब सौगात,खरी खोटी दे गाली।
फिर भी मुखिया आज,करे सबकी रखवाली।
मिले आध को काम,आध हैं भूखे रहते।
कृषक हुये नाराज,देख के बतिया कहते।


तोषण कुमार चुरेन्द्र "दिनकर"
युवा सरपंच व साहित्यकार
ग्राम पंचायत धनगांव

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...