तोर मया के गाँठ हा हावय ओ बड़ पोठ।
गुरतुर मोला लागथे तोर हँसइ अउ गोठ।।
सपना आथे रात मा चेहरा झुलथे नैन।
सोवत बइठत का कहँव दिल मा नंइहे चैन।।
लागे रे पीरीतिया गुड़ मा पागे सोठ।
गुरतुर मोला लागथे तोर हँसइ अउ गोठ।।
आथे सुरता तोर जब ढारय नैना नीर।
तोरे सूरत हे छिपे देखव हिरदे चीर।।
राखँव तोला धाँधके बनके सुग्घर कोठ।
गुरतुर मोला लागथे तोर हँसइ अउ गोठ।।
दिल के रानी मोर तँय हावस मोर परान।
बन जा तैहा राधिका मोला बिलवा जान।।
गुलगुल भजिया मोर तै मैहा मिठई रोठ।
गुरतुर मोला लागथे तोर हँसइ अउ गोठ।।
तोषण धनगंइहा
धनगांव डौंडी लोहारा
बालोद छ.ग.
९६१७५८९६६७
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें