बुधवार, 31 जुलाई 2019

सावन


सावन है मन मोहना,
        बरसे मेघ फुहार।
वन में नाचे मोरनी,
        देखो पंख पसार।।

शिव शंकर के धाम को,
         चलते भक्त हजार।
हँसते गाते झूमते,
         करते जय जय कार।।

हरा भरा खलिहान अब,
         दिखते चारो ओर।
झूमते गाते पेड़ हैं,
         नदिया करते शोर।

आते बादल देख के,
          होते मगन किसान।
धरती बदले काँचली,
          हरित दिखे है धान।।

तोषन धनगंइहा

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