पानी गिरत नंइहे मेंचका नरियात हे
बबा ह नाती ल कहनी सुनात हे
सोंचे बइठ चौपाल म का करय किसान
दुख के बादर हटे कब होही नवा बिहान
पानी ल देखत सबके आंखी खीझ गे
तन के पसीना बिन बादर के रीस गे
जावत हे अषाड़ अब पानी रितयागेहे
तरी तरी के घूना म जीवरा भुँजागेहे
भोला ले फरियाद हे एसो के सावन में
सब किसान खुश रहय पानी ल आवन दे
मन हर हरिया जही अब के हरेली में
एक मूठा ऊपरहा लूके बोरा भरबो पैली में
तोषण कुमार चुरेन्द्र
9617589667
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