आके तँय संसार मा,सबला अपने जान।
पथरा बनके झन रहव,गुरतुर रखव जुबान।।
पथरा हा नारी बने ,लगे राम के पाँव।
कहिथे गुहा निषाद हा,गंगा नइ नहकाँव।।
खड़री माटी के बने, हाँड़ा पथरा जान।
पाँच तत्व के तन मनखे,झनकर गरब गुमान।।
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...
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