शनिवार, 1 जुलाई 2017

बरसात

बरसत पानी देखके, भुँइया खुशी मनाय।
सुवा परेवा कोयली,सुग्घर गीत सुनाय।।

आगे दिन बरसात के,होगे मगन किसान।
नाँगर बइला फाँदके, बोही  अब गा धान।।
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