पुन्नी मास अषाढ़ के,पुन्नी व्यास कहाय।
गढ़य वेद संसार बर,सबके मनला भाय।।१।।
हूम धूप करलव हवन,दीया करलव दान।
कातिक पुन्नी खास हे,करलव गंगा स्नान।।२।।
पुन्नी सावन मास के,करलव वैदिक साज।
उपा करम कर वेद के,बनथय बिगड़त काज।।३।।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
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