१.
पथरा पथरा जोड़ के,बढ़िहा घर सिरजाय।
बिना प्रेम सद्भाव के,घर शमसान कहाय।।
२.
आरुग पथरा तँय रहय,सहय हथौड़ी मार।
बनगे जब भगवान तँय,बिनय करय संसार।।
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
राम नाम
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...
-
"पाँच बातें " पाठ - 14 "पाँच बातें " कक्षा - 4 1- हर एक काम इमानदारी से करो ! 2- जो भी तुम्हारा भला करे, उसका कह...
-
एक सिपाही सीमा मे डटे हे ।अइसन देवारी तिहार म । त मन म का बिचारत हे। का काहत हे आवव देखन ।कविता के चार लाइन हमर देस के जवान मन बर सादर समर...
-
चंडिका में लघु प्रयत्न मात्रा भार १३-१३ ^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^ भारत मेरा देश है, अलग यहाँ का वेश है। ऋषि मुनियों की ये धरा...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें