बुधवार, 12 जुलाई 2017

सावन

*सुधार*

मन मँजूर बन नाचथे,सावन बरसय जोर।
पिया मिलन के आस में,तरसय मन बड़ मोर।।१।।

टिपिर-टिपिर पानी गिरय,सुग्घर सावन मास।
सँइया बिन सुन्ना लगय,मनवा रहय उदास।।२।।

करिया बादर देख के,पवन करत हे शोर।
आही सावन बन पिया, आरो लेवत तोर।।३।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...