*सुधार*
मन मँजूर बन नाचथे,सावन बरसय जोर।
पिया मिलन के आस में,तरसय मन बड़ मोर।।१।।
टिपिर-टिपिर पानी गिरय,सुग्घर सावन मास।
सँइया बिन सुन्ना लगय,मनवा रहय उदास।।२।।
करिया बादर देख के,पवन करत हे शोर।
आही सावन बन पिया, आरो लेवत तोर।।३।।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
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