आवव हमरो गाँव मा, बजार हे बुधवार।
आके जिहाँ बेचात हे,आनी बानी तरकार।।१।।
आके तँयहर छाँट ले,बढ़िहा गोभी फूल।
मुनगा भांँटा खेखसा,बरबट्टी झन भूल।।२।।
लइका मनबर ले चना,मिरचा भजिया तात।
खाँही बढ़िहा चाव ले,एक - दुसर बिजरात।।३।।
टिकली फुंँदरी पावडर, लेलव रुपिया हार।
देखव जोड़ी के मया, किसम-किसम सिंगार।।४।।
देखव आज पताल के, मुड़ी चढ़त हे दाम।
किलो एक चालीस के,ले बिन चलय न काम।।५।।
करके आखिर हाट तँय,खाले बीरो पान।
हवय बजरहा के इही,एके ठन पहिचान।।६।।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
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