रविवार, 18 दिसंबर 2016

चाहता हूँ...

चाहता हूँ...
बनकर फूल गुलाब का महकना चाहता हूँ।
बनकर तारा व्योम में चमकना चाहता हूँ।।
बनकर रग रग में लहू दौड़ता दिनरात मैं,
आंधी हो तूफान हो दहकना चाहता हूँ।।
© ®
तोषण कुमार चुरेन्द्र

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